Turkiye-Earthquake's Killing Spree: भूकंप वैज्ञानिकों (Seismologists ) ने कहा कि सोमवार (6 फरवरी) को तुर्किए और सीरिया में आया 7.8 तीव्रता का भूकंप इस दशक के सबसे खतरनाक भूकंपों में से एक होने की संभावना है. भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी वजह धरती के नीचे 100 किमी (62 मील) से अधिक दूरी तक अनातोलियन (Anatolian) और अरब प्लेटों  (Arabian Plates) के बीच दरार आना है.


धरती के नीचे हुई इस हलचल के बाद अब क्या नतीजा होगा? भूकंप से प्रभावित इन दो देशों में रह-रह कर आने वाले ऑफ्टर शॉक भी जैसे कह रहे हैं कि धरती के गर्भ में कहीं न कहीं कुछ तो खामी है. इस क्षेत्र में 52 साल पहले भी इतना तेज भूकंप आया था, लेकिन उसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2022 में आए भूकंप से कम थी वो 6.0 से ऊपर स्केल का ही था. 


भूकंप आया कहां से ?


भूकंप का केंद्र (Epicentre) पूर्वी एनाटोलियन फॉल्ट (Anatolian Fault) पर तकरीबन 18 किमी की गहराई पर तुर्किए के शहर नूरदगी (Nurdagi) से लगभग 26 किमी पूर्व में था. यहां से भूकंप की तरंगें उत्तर पूर्व की तरफ चलीं, जिससे मध्य तुर्किए और सीरिया में तबाही मच गई. गौरतलब है कि 20वीं शताब्दी के दौरान ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट से बहुत कम भूकंपीय गतिविधि हुई.


ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे में एक मानद शोध सहयोगी रोजर मुसन (Roger Musson) ने कहा, "अगर हम सिस्मोमीटर के रिकॉर्ड किए गए (प्रमुख) भूकंपों पर नजर डालें तो यह कम या ज्यादा ऐसे ही दिखाई देंगे." अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार इस क्षेत्र में 1970 के बाद से केवल 3 भूकंप रिक्टर पैमाने पर 6.0 से ऊपर दर्ज किए गए हैं. लेकिन 1822 में इस क्षेत्र में 7.0 की तीव्रता का भूकंप आया. अनुमान के मुताबिक इसमें 20,000 लोग मारे गए थे. गौरतलब है कि आज सुबह सोमवार 6 फरवरी को तुर्किए और सीरिया में आए भूकंप में अब तक 2600 से अधिक लोग जान गवां चुके हैं. 


कितना खतरनाक और डरावना था ये?


किसी भी साल में औसतन 7.0 तीव्रता से अधिक के 20 से कम भूकंप आते हैं. यही वजह रही कि सोमवार 6 फरवरी को तुर्किए और सीरिया में आया जलजला इतना भयावह रहा. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन इंस्टीट्यूट फॉर रिस्क एंड डिजास्टर रिडक्शन (University College London Institute for Risk and Disaster Reduction) के चीफ जोआना फॉरे वॉकर (Joanna Faure Walker) के मुताबिक, 2016 में मध्य इटली में आए 6.2 भूकंप के मुकाबले तुर्किए-सीरिया भूकंप ने 250 गुना अधिक ऊर्जा छोड़ी थी. इससे लगभग 300 लोग मारे गए थे. इस क्षेत्र में आए भूकंप पर नजर दौड़ाई जाए तो 2013 से 2022 तक के सबसे घातक भूकंपों में से केवल दो ही के नतीजे 6 फरवरी को आए भूकंप की तरह थे. 


 इतना गंभीर क्यों था?


ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट एक स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट है. इनमें, ठोस चट्टान प्लेटें एक दूसरे के खिलाफ एक ऊर्ध्वाधर (Vertical) फॉल्ट रेखा के ऊपर धकेल रही हैं. इनमें तब-तक तनाव, खिंचाव या ऐठन बनी रहती है जब तक कि एक प्लेट क्षैतिज (Horizontal) गति में फिसल न जाए. इससे जबरदस्त मात्रा में तनाव रिलीज होता है, जो भूकंप को ट्रिगर कर सकता है.


कैलिफोर्निया (California) में सैन एंड्रियास फॉल्ट (San Andreas Fault ) शायद दुनिया का सबसे प्रसिद्ध स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट है. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि एक विनाशकारी भूकंप लंबे वक्त से अपेक्षित है. तुर्की-सीरिया भूकंप के लिए प्लेटों में शुरुआती दरार अपेक्षाकृत उथली गहराई पर शुरू हुई थी.


ब्रिटेन में ओपन यूनिवर्सिटी (Open University In Britain) के प्लेनेटरी जियोसाइंटिस्ट डेविड रॉथरी (David Rothery) ने कहा, " सोर्स यानी जहां से भूकंप शुरू हुआ वहां पर इसी तीव्रता के मैग्नीट्यूड का भूकंप आने पर वो इस भूकंप के मुकाबले धरती को और भी बुरी तरह हिलाएंगे या झटके देंगे. 


किस तरह के आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं


इस क्षेत्र में सबसे पहले सुबह आए भूकंप के 11 मिनट बाद  में 6.7-तीव्रता का आफ्टरशॉक आया. इसके घंटे बाद 7.5 तीव्रता का भूकंप आया और फिर इसके बाद दोपहर में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया.भूकंप विज्ञानियों "अब हम जो देख रहे हैं वह गतिविधि धरती के नीचे पड़ोसी फॉल्ट में भी फैल रही है."


ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे  में रिसर्च एसोसिएट मुसन ने कहा. "हम थोड़ी देर के लिए भूकंपीयता (किसी क्षेत्र में बारंबार भूकंप आना) जारी रहने की उम्मीद करते हैं." इस क्षेत्र में 1822 की घातक भूकंप के बाद इसके झटके (Aftershocks)अगले साल तक भी जारी रहे थे. 


आखिर कहां तक जा सकता है मौत का आंकड़ा?


आबादी वाले क्षेत्रों में इस तरह के समान मैग्नीट्यूड के भूकंपों ने हजारों लोगों की जान ली है. 2015 में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने लगभग 9,000 लोगों की जान ले ली थी. ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे में रोजर मुसन ने कहा, "यह अच्छा नहीं होने वाला है" मुसन ने कहा. "ये मौतें हजारों में होगी और दसियों हजारों में भी हो सकती हैं." उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम का मतलब है कि मलबे में फंसे लोगों के बचने की संभावना बेहद कम है.


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