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काशी विश्वनाथ से क्या है मां अन्नपूर्णा का संबंध
Annapurna Jayanti 2024: भोलेनाथ की नगरी काशी विश्वनाथ (kashi vishwanath) में मां अन्नपूर्णा ने स्वयं रहने की इच्छा जताई थी. यहां विराजमान मां अन्नपूर्णा भक्तों को अन्न-धन का भंडार करती हैं.

अन्नपूर्णा जयंती 2024
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
मार्गशीर्ष महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस साल अन्नपूर्णा जयंती 15 दिसंबर 2024 को पड़ रही है. मां अन्नपूर्णा की कृपा से अन्न-धन का भंडार सदैव भरा रहता है. इसलिए इन्हें भरण-पोषण की देवी कहा जाता है.
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
मां अन्नपूर्णा देवी पार्वती का ही रूप है. इन्हें अन्नदा और शाकुम्भी भी कहते हैं. लोगों की भूख मिटाने के लिए मां पार्वती ने ही अन्नपूर्णा का रूप धारण किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं काशी विश्वनाथ से मां अन्नपूर्णा का क्या संबंध है.
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
काशी को महादेव की नगरी कहा जाता है, क्योंकि यहां कण-कण में शिव विराजते हैं. इसके साथ ही काशी में मां अन्नपूर्णा का मंदिर भी है. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो श्रीयंत्र के आकार में निर्मित है.
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
वैसे तो देशभर में मां अन्नपूर्णा के कई मंदिर हैं. लेकिन काशी में विराजमान मंदिर की महिमा खास है. शास्त्रों के अनुसार पार्वती जी ने मां अन्नपूर्णा का रूप धारण कर स्वयं काशी में रहने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद शिवजी उन्हें काशी लेकर आ गए.
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
बाबा की नगरी काशी में विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर मां अन्नपूर्णा का मंदिर भी है. भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद मां अन्नपूर्णा के दर्शन जरूर करते हैं. अन्नपूर्णा जयंती और अन्नकूट उत्सव पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है.
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
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास मां अन्नपूर्णा का मंदिर दशाश्वमेध मार्ग, विश्वनाथ गली में स्थित है. अपने धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक आकर्षण के लिए यह मंदिर प्रसिद्ध है. भक्त जीवन में सुख और समृद्धि के लिए मां का आशीर्वाद लेने इस मंदिर में जाते हैं.
Published at : 08 Dec 2024 06:00 PM (IST)
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प्रशांत कुमार मिश्र, राजनीतिक विश्लेषक
Opinion