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Ex CJI Ranjan Gogoi: रंजन गोगोई ने सांसद के तौर पर 3 साल में नहीं पूछा कोई भी सवाल, डिबेट में भी नहीं लिया हिस्सा, कितनी रही मौजूदगी?
Former CJI Ranjan Gogoi: जस्टिस नज़ीर की राज्यपाल के तौर पर हाल ही में नियुक्ति ने न्यायाधीशों के लिए रिटायरमेंट के बाद की पोस्टिंग पर एक अलग नजरिया दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (फाइल फोटो)
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देखा जाए तो रिटायरमेंट के बाद की पोस्टिंग में पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई का प्रदर्शन कम प्रभावशाली रहा है.ये 3 जज नवंबर 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाने वाले 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा थे. इस पीठ के फैसले में अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि का स्वामित्व मंदिर ट्रस्ट को दिया गया था. (फोटो-@ranjangogoii)
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जस्टिस अशोक भूषण जुलाई 2021 में रिटायर हुए थे और नवंबर 2021 में उन्हें नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष बनाया गया था. पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने नवंबर 2019 में पदमुक्त हुए थे. इसके कुछ महीने बाद ही मार्च 2020 में राज्यसभा का सदस्य नामित किया गया था. जस्टिस नजीर को रिटायरमेंट के 40 दिन बाद अब पोस्टिंग मिल गई है. रिटायरमेंट के बाद की पोस्टिंग की बात की जाए तो जस्टिस गोगोई 3 रिटायरमेंट वाले जस्टिस में सबसे लंबे वक्त तक एक पद पर रहे हैं, लेकिन संसद में पूर्व सीजेआई का प्रदर्शन असरदार नहीं रहा है.(फोटो-Getty)
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उच्च सदन में अपनी नियुक्ति पर, गोगोई ने एक समाचार चैनल से कहा था: “मैंने इस गहरे यकीन की वजह से राज्यसभा के लिए नामांकन की पेशकश मंजूर कर ली कि विधायिका और न्यायपालिका को किसी वक्त में राष्ट्र निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए. (फोटो-Getty)
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पूर्व सीजेआई ने ये भी कहा था कि संसद में मेरी मौजूदगी विधायिका के समक्ष न्यायपालिका के विचारों को पेश करने का एक अवसर होगी. इसी तरह में भी विधायिका के विचारों को जान पाऊंगा. इस तरह से दोनों ही एक-दूसरे को जान पाएंगे.(फोटो-Getty)
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दिसंबर 2021 में, गोगोई ने अपने संस्मरण जस्टिस फॉर द जज (Justice For The Judge) में पोस्टिंग लेने के अपने फैसले का फिर से बचाव किया था. उन्होंने ये समझाया था कि उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के राज्यसभा का नामांकन इसलिए मंजूर किया था क्योंकि वह न्यायपालिका और उत्तर-पूर्व क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को उठाना चाहते थे जहां से वो आते हैं.(फोटो-Getty)
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दरअसल संविधान के मुताबिक भारत के राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 लोगों को राज्यसभा में नामांकित कर सकते हैं.(फोटो-PTI)
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पूर्व सीजेआई गोगोई ने अपने नामांकन के बाद से 3 साल और 8 राज्यसभा सत्रों में राज्यसभा में एक भी सवाल नहीं पूछा है, न ही उन्होंने किसी चर्चा में शिरकत की है, और न ही संसद के रिकॉर्ड के मुताबिक किसी निजी सदस्य का बिल पेश किया है.(फोटो-Getty)
Published at : 14 Feb 2023 10:20 PM (IST)
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रामधनी द्विवेदीवरिष्ठ पत्रकार
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