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हैरान कर देने वाली प्रथा! शादी से पहले जीभ, कान और नाट काटने की परंपरा कहां जारी है

Cutting Traditions: दुनिया के कुछ हिस्सों में जैसे अफ्रीका, पाकिस्तानी और बांगलादेशी क्षेत्रों में शादी से पहले लड़कियों के शरीर के कुछ हिस्से जैसे जीभ या कान काटने की प्रथा प्रचलित है.

Cutting Traditions: दुनिया के कुछ हिस्सों में जैसे अफ्रीका, पाकिस्तानी और बांगलादेशी क्षेत्रों में शादी से पहले लड़कियों के शरीर के कुछ हिस्से जैसे जीभ या कान काटने की प्रथा प्रचलित है.

अफ्रीका के कुछ देशों में जैसे कि एथियोपिया, केन्या, सोमालिया और सूडान, कुछ समुदायों में लड़कियों की शादी से पहले जीभ या कान काटने की प्रथा पाई जाती है. ये प्रथा सदियों से चली आ रही है और अब कुछ स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा बन चुकी है जो युवा महिलाओं के शरीर पर शारीरिक बदलाव का एक रूप मानी जाती है.

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जानकारी के अनुसार भारत के कुछ दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में भी ये प्रथा देखने को मिलती है.
जानकारी के अनुसार भारत के कुछ दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में भी ये प्रथा देखने को मिलती है.
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पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में भी ये प्रथा प्रचलित है खासकर ग्रामीण इलाकों में. यहां ये मान्यता है कि इस तरह के शारीरिक कृत्य से लड़कियों को सम्मान मिलता है और वे समाज में ‘योग्यता’ हासिल करती हैं और इससे उनकी खूबसूरती बढ़ती है.
पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में भी ये प्रथा प्रचलित है खासकर ग्रामीण इलाकों में. यहां ये मान्यता है कि इस तरह के शारीरिक कृत्य से लड़कियों को सम्मान मिलता है और वे समाज में ‘योग्यता’ हासिल करती हैं और इससे उनकी खूबसूरती बढ़ती है.
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बांगलादेश में भी इस प्रकार की प्रथाएं देखने को मिलती हैं जहां कुछ क्षेत्रों में लड़कियों को शादी से पहले अपने शरीर के कुछ अंगों को काटना पड़ता है.
बांगलादेश में भी इस प्रकार की प्रथाएं देखने को मिलती हैं जहां कुछ क्षेत्रों में लड़कियों को शादी से पहले अपने शरीर के कुछ अंगों को काटना पड़ता है.
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ये प्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन है क्योंकि इसमें महिलाओं के शरीर पर बिना उनकी सहमति के अत्याचार किए जाते हैं. जीभ या कान काटने जैसी प्रथाएं न केवल शारीरिक चोट पहुंचाती हैं बल्कि मानसिक तनाव और भविष्य में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनती हैं.
ये प्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन है क्योंकि इसमें महिलाओं के शरीर पर बिना उनकी सहमति के अत्याचार किए जाते हैं. जीभ या कान काटने जैसी प्रथाएं न केवल शारीरिक चोट पहुंचाती हैं बल्कि मानसिक तनाव और भविष्य में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनती हैं.
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इस प्रथा को रोकने के लिए विभिन्न मानवाधिकार संगठन और गैर सरकारी संगठन एक्टिव होकर काम कर रहे हैं. इन संगठनों का उद्देश्य इन प्रथाओं के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है.
इस प्रथा को रोकने के लिए विभिन्न मानवाधिकार संगठन और गैर सरकारी संगठन एक्टिव होकर काम कर रहे हैं. इन संगठनों का उद्देश्य इन प्रथाओं के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है.
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कई देशों की सरकारें भी इस प्रथा को रोकने के लिए कदम उठा रही हैं. उनके कानून के अनुसार इन प्रथाओं को गैरकानूनी घोषित करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है.
कई देशों की सरकारें भी इस प्रथा को रोकने के लिए कदम उठा रही हैं. उनके कानून के अनुसार इन प्रथाओं को गैरकानूनी घोषित करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है.
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इस प्रकार की प्रथाओं को समाप्त करने के लिए समाज में गहरी बदलाव की आवश्यकता है. समाज में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति एक व्यापक सोच और समझ की जरूरत है ताकि ये प्रथाएं पूरी तरह से समाज से समाप्त हो सकें.
इस प्रकार की प्रथाओं को समाप्त करने के लिए समाज में गहरी बदलाव की आवश्यकता है. समाज में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति एक व्यापक सोच और समझ की जरूरत है ताकि ये प्रथाएं पूरी तरह से समाज से समाप्त हो सकें.

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