दशहरा पर भगवान महाकाल की सवारी का ऐतिहासिक स्वागत, एक किलोमीटर तक बिछाए गए फूल
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उज्जैन में विजयदशमी के अवसर पर भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है. पंडित मंगलेश गुरु के मुताबिक भगवान महाकाल की सवारी प्राचीन काल से ही भगवान महाकाल के दरबार से निकलकर नए शहर में पहुंचती है.
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दशहरा मैदान पर शमी की पूजा होती है, जिसके बाद सवारी फिर महाकालेश्वर मंदिर के लिए रवाना होती है. पंडित मंगलेश गुरु ने बताया कि विजयदशमी पर्व पर शस्त्र पूजा के लिए भी प्रसिद्ध है.
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भगवान महाकाल इस दिन नगर भ्रमण के लिए नए शहर में भी जाते हैं. परंपरा अनुसार जिले के कलेक्टर द्वारा पालकी की पूजा की जाती है.
उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह परंपराओं को निभाते हुए मनमहेश के रूप में प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए निकले भगवान महाकाल का पूजन किया.
इंदौर गेट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल यादव और रोशन यादव ने बताया कि सवारी मार्ग में आंशिक फेर बदल करते हुए इंदौर गेट क्षेत्र से निकल जाने की मांग की गई थी.
महाकालेश्वर मंदिर समिति और जिला प्रशासन उनकी मांग को पूरा करते हुए सवारी को इंदौर गेट क्षेत्र से निकला. व्यापारियों ने 1 किलोमीटर लंबी रंगोली बनाई और पूरे मार्ग में पुष्प बिछाकर पुष्प से ही वर्षा की गई.
भगवान महाकाल की सवारी सावन भादो के साथ-साथ कार्तिक और अग्गन मास में भी निकलती है लेकिन सवारी अपने पुराने परंपरागत मार्ग से गुजरती है. विजयदशमी पर्व पर भगवान महाकाल की सवारी मंदिर से निकलकर नए शहर में प्रवेश करती है.
वर्ष भर में एक बार नए शहर में भगवान महाकाल प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए गुजरते हैं, इसलिए नए शहर के साथ-साथ पुराने शहर में भी शिव भक्तों ने जमकर आतिशबाजी करते हुए भगवान महाकाल का स्वागत किया.
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