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In Pics: राजस्थान में पहली बार होगा आदिवासी गांव में बड़ा महोत्सव, दिखेगी अनदेखी संस्कृति
इस महोत्सव में जनजाति क्षेत्र के लोगों की संस्कृति के साथ साथ वहां के प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख पाएंगे.

(राजस्थान में पहली बार होगा आदिवासी गांव में बड़ा महोत्सव)
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
झीलों की नगरी उदयपुर शहर में कई महोत्सव होते हैं जो विश्व प्रसिद्ध है. लेकिन अब पर्यटन सिर्फ शहरों तक सीमित न हो इसके लिए आदिवासी गांव में एक महोत्सव होने जा रहा हैं. यह प्रदेश में पहली बार होने जा रहा है. इसकी तैयारी के लिए कलेक्टर से लेकर प्रशासनिक अधिकार लगातार इसके लिए जुटे हुए हैं. इस महोत्सव में जनजाति क्षेत्र के लोगों की संस्कृति के साथ साथ वहां के प्राकृतिक सौंदर्य को भी देख पाएंगे.
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
यह महोत्सव उदयपुर जिले के कोटड़ा तहसील में हो रहा है. कोटड़ा जो उदयपुर सीमा का आखरी छोर है और इसके बाद गुजरात सीमा आती है. बड़ी बात यह हैं कि इस कोटड़ा में किसी अधिकारी का ट्रासंफर हो जाता है तो वह रुकवाने के लिए हर कोशिश करता है. यहां तक कि कुछ कलेक्टर भी ऐसे हुए जो अपने कार्यक्रल में एक भी बार वहां नहीं गए. यह है तो उदयपुर जिले में लेकिन यहां का पहनावा, खान-पान सहित जीवनशैली के हर तौर तरीके अलग है. यह शहर से दूर भी पड़ता है लिए वहां कोई जाता नहीं है. जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा है ऐसे पहले कलेक्टर है जो लगातार कोटड़ा का दौरा कर मुख्य धारा से जोड़ रहा है. इन्हीं की पहल से यह महोत्सव हो रहा है. महोत्सव 27 से 29 सितंबर से शुरू होगा जिसकी तैयारियां शुरू हो गई है.
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
रविवार को कलेक्टर मीणा महोत्सव की तैयारियों का जायजा लेने कोटड़ा पहुंचे एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक ली, लोक कलाकारों से मुलाकात कर उनकी परफॉर्मेंस देखी और आयोजन स्थल चिन्हित करने हेतु विभिन्न साइट्स का भ्रमण किया. जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को कोटड़ा महोत्सव का भव्य आयोजन करने के निर्देश दिए. जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने कोटड़ा पंचायत समिति सभागार में महोत्सव की तैयारियों के लिए अधिकारियों की आवश्यक बैठक बुलाई. बैठक के दौरान कलाकारों ने कलेक्टर को अपनी लोक कलाओं की प्रस्तुति दिखाई. कलेक्टर ने सभी से अपील करते हुए कोटड़ा महोत्सव को समावेशी बनाने एवं विभिन्न आकर्षक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए जिससे कि विश्व स्तर तक कोटड़ा महोत्सव का नाम पहुंचे एवं भविष्य में भी इसे नियमित रूप से आयोजित किया जा सके.
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
महोत्सव में विदेशी पर्यटकों को भी कोटड़ा ले जाया जाएगा. इसके लिए होटल संचालकों के साथ बैठक कर ली गई है. इन पर्यटकों को ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था रहेगी. विदेशी पर्यटकों को महोत्सव में लाने का उद्देश्य यहां की ट्राइबल लाइफ स्टाइल को विदेशों तक पहुंचाना है. जब ये पर्यटक महोत्सव देखकर अपने देश में इनकी माउथ पब्लिसिटी करेंगे या इनसे जुड़े फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे तो इवेंट की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग होगी. इससे एक तरफ दूसरे पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा, दूसरी ओर यहां के कल्चर को बढ़ावा देने के लिए संस्थाएं भी आगे आएंगे. महोत्सव में स्थानीय लोगों को भी बुलाया जाएगा, जो अपनी पारंपरिक वेशभूषा में होंगे.
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
महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो होंगे ही, थीम के अनुसार तरह-तरह के स्टॉल भी लगाए जाऐंगे. इन स्टॉल्स पर ट्राइबल आर्ट, पेंटिंग, खिलौने, आभूषण, वस्त्र, इलाज के तरीके आदि दर्शाए जाएंगे. सोच यह है कि शेष दुनिया से दूर आदिवासी समुदाय के रहन सहन, खान-पान से लेकर अनदेखे अनजाने सामाजिक ताने-बाने को सबके सामने लाया जा सके. इसके साथ ही कोटड़ा के विभिन्न प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की पेंटिंग्स भी लगाई जाएंगी. कार्यक्रम के दौरान ट्राइबल स्पोट्र्स भी लाइव दिखाएंगे. ये खेल दर्शकों को भी रोमांचित करेंगे.
Published at : 12 Sep 2022 12:11 PM (IST)
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
रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार
Opinion