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क्या Social Media पर मौजूद आपकी तस्वीरें सुरक्षित हैं? जानें कैसे Deepfake तकनीक का हो रहा है दुरुपयोग
Deepfake तकनीक तेजी से विकसित हो रही है. डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें Artificial Intelligence (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग कर तस्वीरों, वीडियो या ऑडियो को इस तरह से बदला जाता है कि वे असली लगें.

तकनीकी प्रगति के साथ, Deepfake तकनीक तेजी से विकसित हो रही है. डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें Artificial Intelligence (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग कर तस्वीरों, वीडियो या ऑडियो को इस तरह से बदला जाता है कि वे असली लगें. यह तकनीक जहां एक ओर मनोरंजन और क्रिएटिव इंडस्ट्री में उपयोगी साबित हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है.
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Deepfake तकनीक का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तकनीक का उपयोग कर किसी व्यक्ति की छवि या वीडियो को आपत्तिजनक सामग्री में बदल दिया जाता है.
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खासकर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है. कई बार इसे बदनाम करने, ब्लैकमेल करने या झूठी जानकारी फैलाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
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साइबर अपराधी डीपफेक का उपयोग कर झूठे वीडियो बनाकर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कई मामलों में, राजनेताओं और मशहूर हस्तियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल देखा गया है. इसके अलावा, यह तकनीक वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी पहचान बनाने में भी उपयोगी हो सकती है.
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डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं. तस्वीरों और वीडियो का सीमित उपयोग: सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करते समय सावधानी बरतें. जरूरी न हो तो निजी तस्वीरें सार्वजनिक न करें.
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साइबर सुरक्षा ऐप्स और एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें, जो डीपफेक और अन्य साइबर खतरों से बचाव में मदद कर सकते हैं.
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी अनजान लिंक या संदिग्ध सामग्री पर क्लिक करने से बचें. यदि आपको लगता है कि आपकी छवि या सामग्री का दुरुपयोग हुआ है, तो तुरंत साइबर अपराध विभाग से संपर्क करें.
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डीपफेक तकनीक की पहचान करने के लिए उपलब्ध टूल्स जैसे Deepware या Sensity AI का उपयोग करें.
Published at : 10 Jan 2025 08:03 PM (IST)
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राजेश शांडिल्यसंपादक, विश्व संवाद केन्द्र हरियाणा
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