ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हालिया सीरीज साख की लड़ाई थी. आईसीसी की वनडे रैंकिंग्स में भले ही इंग्लैंड की टीम नंबर एक पर है. लेकिन इस वक्त ऑस्ट्रेलिया और भारत की टीमें कमाल की फॉर्म में हैं. ऑस्ट्रेलिया ने जिस बड़े अंतर से पहले मैच में भारत को हराया उससे भारतीय टीम और उसके फैंस का डर जरूर बढ़ गया. एक बार को तो ये सवाल उठा ही क्या टीम इंडिया बड़ी टीमों के खिलाफ अभी तैयार नहीं है. लेकिन इस सवाल का जबाव अगले ही दो मैचों में टीम इंडिया ने दे दिया. इन दोनों ही मैचों में जीत के बड़े स्टार केएल राहुल और रोहित शर्मा रहे. लेकिन शीट एंकर के रोल में रवींद्र जडेजा ने भी अपना काम किया. तीसरे वनडे में जो एक फाइनल सरीखा था जडेजा ने जबरदस्त किफायती गेंदबाजी करने के साथ साथ दो विकेट भी लिए. एक ही ओवर में दो विकेट झटककर उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम को बैकफुट पर ढकेल दिया. वरना एक वक्त पर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 300 रनों के पार जाता दिखाई दे रहा था. बैंगलुरू वनडे में जडेजा ने 10 ओवर में सिर्फ 44 रन दिए. उन्होंने खतरनाक बल्लेबाज मार्नस लबुशेन को 54 रनों पर आउट किया. इसके अलावा इसी ओवर की आखिरी गेंद पर उन्होंने मिचेल स्टार्क को भी पवेलियन की राह दिखाई. एरॉन फिंच के रन आउट में भी उनका रोल कमाल का था. इससे पहले दूसरे वनडे में भी रवींद्र जडेजा का रोल बेमिसाल था. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे खतरनाक बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा था. पहले उन्होंने पहले मैच के शतकवीर और कप्तान एरॉन फिंच को केएल राहुल के हाथों स्टंप कराया. इसके बाद उन्होंने मार्नस लबुशेन को मोहम्मद शमी के हाथों कैच कराया. 10 ओवर में 58 रन देकर वो टीम के दूसरे सबसे किफायती गेंदबाज भी थे. जडेजा ने गेंदबाजी के साथ साथ बल्लेबाजी में भी अपने हाथ खुलकर दिखाए थे. उन्होंने 16 गेंद पर 20 रनों की पारी खेली थी. जिसमें 1 चौका शामिल था.

रवींद्र जडेजा काट चुके हैं 14 महीने का वनवास

रवींद्र जडेजा अब 162 वनडे मैच खेल चुके हैं. उनका अंतर्राष्ट्रीय वनडे करियर लगभग 11 साल का हो गया है. इस लंबे करियर में एक वक्त ऐसा भी आया जब लगा कि रवींद्र जडेजा का वनडे करियर खत्म होने की कगार पर है. यही वो वक्त था जब युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की टीम इंडिया में ‘एंट्री’ हुई थी. कप्तान विराट कोहली इस फैसले पर पहुंचे थे कि उन्हें स्पिन गेंदबाज के तौर पर टीम में ऐसे खिलाड़ी चाहिए वो बीच के ओवरों में विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करें. विराट खुद भी कहते थे कि ऐसे स्पिनर्स बीच बीच में महंगे साबित होंगे लेकिन उससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता. विराट की इस परिभाषा पर ना आर अश्विन फिट बैठ रहे थे और ना ही रवींद्र जडेजा. ये दोनों ही गेंदबाज रन तो कम देते थे लेकिन विरोधी टीम के बल्लेबाजों को आउट करने में इन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल रही थी. यही वजह है कि धीरे धीरे इन दोनों की वनडे टीम से छुट्टी हो गई. 2017 में जुलाई के महीने में रवींद्र जडेजा के वनडे करियर पर एक विराम सा लग गया. अगले करीब 14 महीने रवींद्र जडेजा वनडे टीम से बाहर रहे. 6 जुलाई 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच खेलने के बाद जब वो टीम से बाहर हुए तो सीधे सितंबर 2018 में बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में लौटे. लेकिन इस बार जब जडेजा वापस लौटे तो उन्होंने टीम में अपनी उपयोगिता अलग तरह से साबित की.

फील्डिंग का ‘बोनस’ अलग से जोड़िए

रवींद्र जडेजा इस वक्त दुनिया के सबसे चुस्त फील्डर्स में से एक हैं. उनके आस पास से रन चुराना बड़े बड़े बल्लेबाज के लिए डरावनी बात है. यही वजह है कि हर मैच में वो 8-10 रन अपनी चुस्त दुरूस्त फील्डिंग से बचाते हैं. विराट कोहली वैसे भी फिट खिलाड़ियों को पसंद करते हैं. लिहाजा 14 महीने के वनवास को काट कर लौटने के बाद जडेजा लगातार टीम में बने हुए हैं. हां ये जरूर है कि उनके टीम में रहने से टीम इंडिया में कुलचा की जोड़ी टूटती है. जो रिस्क उठाने को विराट कोहली फिलहाल तैयार हैं.