रोहित शर्मा के लिए वक्त रूकेगा नहीं. ये समझने का मौका भी नहीं देगा कि रिकॉर्ड बुक को कब तक खंगाला जाए. रोहित शर्मा को ये बात समझनी होगी. उनकी फॉर्म को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. क्रिकेट फैंस की चिंताएं, नियमित कप्तान विराट कोहली की चिंताएं, सेलेक्टर्स की चिंताएं और बोर्ड की चिंताएं. दक्षिण अफ्रीका के बाद श्रीलंका लगातार दूसरी सीरीज है जहां रोहित शर्मा से रन नहीं बन रहे हैं.


सोमवार को ट्राएंगुलर सीरीज के अहम मैच में श्रीलंका के खिलाफ रोहित शर्मा सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए. वो तो राहत की बात है कि मध्यक्रम में मनीष पांडे और दिनेश कार्तिक ने सूझबूझ से बल्लेबाजी करते हुए अहम मैच में भारत को जीत दिला दी वरना रोहित शर्मा के फॉर्म को लेकर किचकिच और सवालों का दौर शुरू हो गया होता. सोमवार को श्रीलंका ने भारत को जीत के लिए 19 ओवर में 153 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे टीम इंडिया ने 17.3 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया. इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने ट्राएंगुलर सीरीज के फाइनल में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. भारत का अगला मैच 14 मार्च को बांग्लादेश से होगा.


मैच दर मैच बढ़ती जा रही हैं रोहित की मुश्किल

रोहित शर्मा ने सोमवार को हमेशा की तरह भारतीय पारी की शुरूआत की. सुरंगा लकमल की पहली गेंद पर उन्होंने कोई रन नहीं बनाया. दूसरी गेंद जो थोड़ी छोटी थी, उस पर रोहित शर्मा ने छक्का मारा. आप रोहित शर्मा का वो शॉट देखिए. यकीन ही नहीं होगा कि वो एक ऐसे खिलाड़ी के बल्ले से निकला शॉट है जो आउट ऑफ फॉर्म चल रहा हो. वो नेक्सट टू परफेक्ट शॉट था. रोहित शर्मा के शरीर का संतुलन. शॉट खेलने की टाइमिंग. क्लीन शॉट. ऐसा लगा कि लकमल की वो गेंद देखने के बाद रोहित शर्मा का हाथ किसी मशीन की तरह चला. अगली गेंद खराब थी, उस पर भी रोहित शर्मा ने चौका जड़ा. चौके में सिर्फ टाइमिंग की बात थी. ऐसा भरोसा जगा कि अब रोहित आराम से क्रीज पर कुछ वक्त बिताएंगे और सूझबूझ भरी पारी खेलेंगे. पर ऐसा हुआ नहीं अगले ही ओवर में रोहित शर्मा अनमने ढंग से खेले गए एक शॉट पर आउट हो गए.


स्पिनर अकीला धनंजय की गेंद को वो मिडविकेट के ऊपर से खेलना चाहते थे लेकिन शॉट खेलने के लिए सही जगह नहीं बना पाए. इस सीरीज के तीन, इससे पहले दक्षिण अफ्रीका सीरीज के टी-20 सीरीज के तीन, वनडे सीरीज के 5 और टेस्ट सीरीज की चार पारियों से रोहित शर्मा का यही हाल है. कुल मिलाकर क्रिकेट के हर फॉर्मेट की पारियां जोड़ ली जाएं तो पिछली 15-16 पारियों में उनके पास गिनाने को सिर्फ एक शतक है.


आउट ऑफ फॉर्म होने का सबसे बुरा समय


यूं तो करियर में हर खिलाड़ी कभी ना कभी आउट ऑफ फॉर्म होता है, लेकिन कई बार आउट ऑफ फॉर्म होने की ‘टाइमिंग’ भी बड़ी ‘क्रूशियल’ होती है. अगले साल वर्ल्ड कप होना है. वर्ल्ड कप से पहले भारतीय टीम लगभग लगभग विदेशी दौरों पर ही रहेगी. दुनिया की सभी टीमों का रोड टू वर्ल्ड कप प्लान शुरू हो चुका है. हर एक मैच पर सभी की निगाहें हैं.


ऐसे में लगातार आउट ऑफ फॉर्म रहने वाले खिलाड़ी को अगर बाहर बैठना पड़ेगा तो कोई ताज्जुब की बात नहीं है. टी-20 के मुकाबले वनडे क्रिकेट में बल्लेबाज के समय थोड़ा समय ज्यादा होता है लेकिन रोहित पिछली सीरीज में उस समय का भी सही इस्तेमाल नहीं कर पाए थे. रोहित जैसा धमाकेदार खिलाड़ी अगर वर्ल्ड कप की टीम में नहीं होता तो ये टीम के लिए अच्छी बात नहीं है. बशर्ते ये बात रोहित शर्मा को भी समझ आ जाए. अभी तक हर किसी ने उन पर भरोसा किया है. उन्हें टीम की कमान तक सौंपी गई है. बीसीसीआई ने हाल में जो खिलाड़ियों का जो सालाना करार किया है, उसमें रोहित शर्मा को ‘ए-प्लस’ ग्रेड में जगह दी है. अब ये जिम्मेदारी रोहित शर्मा की है कि वो इस भरोसे पर खरे उतरें. उन्हें सबसे पहले धैर्य दिखाना होगा.