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अब बदली रणनीति के साथ बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे मयंक अग्रवाल

टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया की ओपनिंग जोड़ी को लेकर कई सवाल हैं. इन सवालों के बीच मयंक अग्रवाल की दावेदारी सबसे मजबूत है. लेकिन उन्हें वनडे सीरीज की नाकामी से बाहर निकलना होगा. पढ़िए वरिष्ठ खेल पत्रकार शिवेंद्र कुमार सिंह का आंकलन

आज से दस दिन पहले अगर कोई आपसे सवाल करता कि न्यूज़ीलैंड में टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया की बल्लेबाजी की शुरूआत कौन करेगा तो आपका जवाब होता मयंक अग्रवाल और पृथ्वी साव. लेकिन दस दिनों के भीतर समीकरण इतनी तेजी से बदले हैं कि अब ये बात कोई दावे से नहीं कह सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सलामी बल्लेबाजों की ये जोड़ी वनडे सीरीज में बुरी तरह फ्लॉप रही. टेस्ट सीरीज शुरू होने में अब एक हफ्ते से भी कम का समय है. न्यूज़ीलैंड इलेवन के खिलाफ प्रैक्टिस मैच चल रहा है. प्रैक्टिस मैच पहले दिन के मुकाबले दूसरे टीम टीम इंडिया के लिए ज्यादा बेहतर रहा. पहली पारी में बुरी तरह फ्लॉप रही सलामी जोड़ी को दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत मिली है. भारतीय गेंदबाजों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है. कप्तान विराट कोहली की सबसे पैनी नजर मयंक अग्रवाल पर ही होगी. पिछले कुछ समय से मयंक अग्रवाल टेस्ट टीम का नियमित हिस्सा रहे हैं. उन्होंने छोटे से टेस्ट करियर में कई अहम पारियां खेली हैं. वनडे सीरीज की नाकामी के बाद भी टेस्ट सीरीज की सलामी जोड़ी में उनका नाम तो तय ही है. आपको बता दें कि रोहित शर्मा और शिखर धवन की गैरमौजूदगी में कप्तान विराट कोहली ने मयंक अग्रवाल और पृथ्वी साव से पारी की शुरुआत कराने का फैसला किया था. पृथ्वी साव तो फिर भी कुछ रन बना पाए. मयंक अग्रवाल का बल्ला बिल्कुल ही नहीं चला. तीन वनडे मैच की सीरीज में उन्होंने सिर्फ 36 रन बनाए थे. इसलिए विराट कोहली इस बात की तस्दीक करेंगे कि मयंक अग्रवाल कम से कम टेस्ट सीरीज में अच्छे ‘माइंडसेट’ के साथ मैदान में उतरें. वनडे सीरीज की बुरी फॉर्म से निकलना होगा मयंक अग्रवाल के लिए वनडे सीरीज बड़ा मौका थी. लेकिन तीनों ही मैच में वो चूक गए. पहले वनडे में उन्हें अच्छी शुरुआत मिली थी. उन्होंने 30 रन का आंकड़ा पार कर लिया था. इसमे 6 चौके भी शामिल थे. उनकी स्ट्राइक रेट भी 100 से ज्यादा की थी. लेकिन सउदी की एक औसत सी गेंद पर ब्लंडेल ने उनका शानदार कैच लपक लिया. इसके बाद अगले दोनों मैच में उनमें आत्मविश्वास की कमी दिखी. दूसरे और तीसरे वनडे में वो दहाई के आंकड़े तक भी नही पहुंचे. ये बात इसलिए चर्चा में आई क्योंकि मयंक अग्रवाल को तकनीक और टेंपरामेंट के लिहाज से बेहतर बल्लेबाज माना जाता है. वो तेज गेंदबाज़ों के साथ साथ स्पिन गेंदबाजों का का सामना भा सहजता से करते हैं. उनके शरीर का संतुलन लाजवाब रहता है. एक परिपक्व बल्लेबाज़ की तरह शुरू से ही उन्हें हमेशा अपने ऑफ स्टंप का पता रहता है. उनकी बॉल सेंस कमाल की है. वो गेंद को देरी से खेलते हैं. अब तक खेले गए टेस्ट मैच में आपने अगर उनकी बल्लेबाजी देखी है तो आप मानेंगे कि उनका फुटवर्क भी अच्छा है. स्पिन गेंदबाज़ों के खिलाफ वो पुल शॉट्स भी खेलते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वो गेंद की लेंथ को पहले से समझ लेते हैं. स्पिनर्स के ख़िलाफ़ वो एक्सट्रा कवर की दिशा में शॉट्स लगाते हैं. अलग कहानी कहते हैं टेस्ट सीरीज में मयंक के रिकॉर्ड्स साल 2018 में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुश्किल सीरीज खेल रही थी. तीसरे टेस्ट मैच में मयंक अग्रवाल को टेस्ट करियर की शुरूआत करने का मौका मिला. पहली ही पारी में उन्होंने अर्धशतक जड़ा था. मयंक अग्रवाल को वही आत्मविश्वास वापस हासिल करना होगा जो उन्हें टेस्ट करियर से मिला है. जिस टेस्ट टीम में विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा जैसे बड़े बल्लेबाज हैं उसमें मयंक अग्रवाल ने बहुत कम समय में नाम कमाया है. मयंक अग्रवाल टेस्ट करियर में अलग ही बल्लेबाज दिखते हैं. अब तक खेले गए 9 टेस्ट मैच में उन्होंने 872 रन बनाए हैं. इसमें उन्होंने 3 शतक और 3 अर्धशतक बनाए हैं. बड़ा बात ये है कि इसमें 2 दोहरे शतक भी शामिल हैं. 9 टेस्ट मैच में उनकी औसत 67 से ज्यादा रन की है. आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप 5 बल्लेबाजों में भारत का सिर्फ एक बल्लेबाज है. वो बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ही हैं. उन्होंने 7 मैच में 677 रन बनाए हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट फॉर्मेट में मयंक अग्रवाल को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. बशर्ते उनका ‘माइंडसेट’ सकारात्मक रहे.
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