Chhath 2022: आज छठ का दूसरा दिन, खरना पर कई साल बाद बन रहा शुभ योग, नक्षत्र समेत सारी जानकारी देखें
Kharna 2022: आज पूरे दिन छठ व्रती निर्जला उपवास रहेंगे. खरना के दिन से ही छठ व्रतियों का कष्ट और पूजन शुरू हो जाता है. खरना पूजा और तिथि, मुहूर्त के बारे में जानिए.
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पटना: चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ का आज दूसरा दिन यानी खरना (Kharna 2022) है. इस महापर्व में खरना का बहुत ज्यादा महत्व होता है. खरना के दिन से ही छठ व्रतियों का कष्ट और पूजन शुरू हो जाता है. आज पूरे दिन छठ व्रती निर्जला उपवास रहेंगे. छठ व्रती या उसके परिवार वाले पूरी शुद्धता के साथ गंगा घाट जाकर सुबह से ही गंगाजल लाने के लिए घाट पर जुट गए हैं. आज के प्रसाद में गंगाजल का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं खरना के बारे में और क्या है शुभ योग और नक्षत्र.
आज किस तरह होगी पूजा?
आज दूध और गंगाजल, गुड़ एवं अरवा चावल मिलाकर खीर बनाई जाती है. चीनी की अपेक्षा गुड़ को ज्यादा शुद्ध माना जाता है. गुड़ की खीर के अलावा शुद्ध रूप से पिसा हुआ गेहूं के आटे की रोटी बनती है. सभी प्रसाद आम की लकड़ी की आग पर बनाया जाता है. छठ व्रती पूरे दिन उपवास कर शाम में गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाती हैं. शाम में सूर्य अस्त होने के बाद जैसे ही अंधेरा होता है उस वक्त भगवान भास्कर और छठी मां की पूजा करते हैं.
खरना की पूजा पर पहले भगवान को अलग से प्रसाद चढ़ाया जाता है जो केले के पत्ते पर रखना शुभ माना जाता है. पौराणिक परंपरा के अनुसार खरना का प्रसाद केले के पत्ते पर ही खाना चाहिए, लेकिन अधिकांश जगहों पर केला का पत्ता मिलना संभव नहीं होता है तो मिट्टी के बर्तन में भगवान सूर्य को खरना का प्रसाद निकाला जाता है. छठ व्रती द्वारा खरना करने के बाद सूर्य देव के लिए निकाला गया प्रसाद घर के सभी सदस्यों को दिया जाता है. उसके बाद आसपास के लोगों को प्रसाद खाने के लिए बुलाया जाता है. खरना के बाद छठ व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं.
कई सालों बाद बना ऐसा शुभ योग
वैसे तो छठ लोक आस्था का पर्व है. इसमें कोई भी पंचांग या ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती है. पंचांग में छठ पर्व या खरना का कोई जिक्र नहीं है लेकिन पंचांग के अनुसार आज के खरना के दिन को बहुत ही शुभ योग बताया गया है जो काफी सालों बाद बन रहा है. विद्वान ब्राह्मण अशोक कुमार पांडेय बताते हैं कि पंचांग के अनुसार आज सूर्योदय सुबह 6:25 बजे है, जबकि सूर्यास्त शाम 5:35 बजे. सूर्यास्त के लगभग आधे घंटे बाद अंधेरा होने पर खरना कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि इस बार का खरना का दिन बहुत ही ज्यादा शुभ है. खरना पंचमी तिथि में होता है परंतु आज 10:28 बजे तक चौथ है. आज का दिन शनिवार है और शनि ज्योतिष विद्या के अनुसार शनिवार को चौथ का दिन होने पर रिक्ता तिथि में बदलाव जाता है. रिक्ता तिथि होने पर सिद्धि योग होता है. आज के दिन किसी भी प्रकार का कोई भी शुभ कार्य या पूजन करने पर सिद्धि होती है और कोई सच्चे मन से उस कार्य को करता है हर मनोकामना पूरी होती है. आज दिन के 12:05 बजे से मूल नक्षत्र चढ़ रहा है. खरना का समय मूल नक्षत्र में ही होगा. यह नक्षत्र भी काफी शुभ माना जाता है. कुल मिलाकर आज का दिन बहुत ज्यादा शुभकारी है.
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