पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar), उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ 13 जुलाई को पटना में एक विरोध मार्च के दौरान भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं पर पुलिस लाठीचार्ज के संबंध में शनिवार को एक स्थानीय अदालत में शिकायत दाखिल की. यह शिकायत प्रदेश बीजेपी (BJP) की महिला सेल की प्रमुख लाजवंती झा ने दर्ज करायी है. इससे पहले इसी तरह की शिकायत बीजेपी कार्यकर्ता कृष्णा सिंह कल्लू ने पटना की एक अदालत में दाखिल की थी.


सरकार के निर्देश पर हुई थी कार्रवाई- लाजवंती झा 


लाजवंती झा ने पत्रकारों से कहा कि 13 जून को बीजेपी कार्यकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं पर पुलिस लाठीचार्ज बर्बरतापूर्ण था और यह मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जिला प्रशासन और पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर किया गया था. हमारे एक कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह की लाठीचार्ज के कारण मौत हो गई. जो लोग जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. मैंने सक्षम अदालत में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए इस संबंध में शिकायत दाखिल की है.


प्रशासन के अनुसार हृदय रोग से हुई मौत


पटना जिला प्रशासन ने गुरुवार दावा किया था कि विजय सिंह की मृत्यु हृदय रोग और उससे संबंधित जटिलताओं के कारण हुई. जिला प्रशासन के एक बयान में कहा गया था कि पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और संस्थान द्वारा की गई हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच दोनों ने निष्कर्ष निकाला कि सिंह की मृत्यु हृदय रोग और उससे संबंधित अन्य जटिलताओं के कारण हुई. जिला प्रशासन ने यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से साफ पता चलता है कि बीजेपी कार्यकर्ता सिंह दोपहर 1:22 बजे से 1:27 बजे के बीच छज्जू बाग इलाके में बेहोश हो गए, जबकि लाठीचार्ज डाक बंगला क्रॉसिंग इलाके में हुआ. प्रशासन ने कहा कि सिंह उस स्थान पर मौजूद नहीं थे जहां लाठीचार्ज हुआ था.


बीजेपी ने लगाया आरोप


बता दें कि यह घटना राज्य सरकार की शिक्षकों की नयी भर्ती नीति के खिलाफ बीजेपी के विरोध मार्च के दौरान हुई थी, हालांकि, बीजेपी ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को ‘बनावटी’ करार दिया और पीएमसीएच द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की. राज्य के बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने 13 जुलाई की घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर काम किया.


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