Kanhaiya Kumar News: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा रविवार (30 मार्च, 2025) को अररिया पहुंची. हालांकि कन्हैया कुमार को बीच में ही यात्रा रोकनी पड़ गई. वे दिल्ली लौट गए. 16 मार्च को पश्चिम चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम से उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत की थी.


दरअसल तय रूट के अनुसार बीते रविवार को कन्हैया कुमार को काली मंदिर चौक होते हुए चांदनी चौक और फिर कांग्रेस कार्यालय गांधी आश्रम तक जाना था. यहां कन्हैया को बेरोजगारी और पलायन पर कार्यकर्ताओं से संवाद करना था. पदयात्रा में हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए. नारेबाजी करते हुए काफिला काली मंदिर चौक तक पहुंचा. इसी बीच कन्हैया कुमार अचानक यात्रा छोड़कर निकल गए.


कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?


इस पूरे मामले में कांग्रेस जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन खान ने बताया कि राहुल गांधी का सात अप्रैल को पटना में कार्यक्रम तय हुआ है. इसी को लेकर कन्हैया को फोन आया और उन्हें दिल्ली बुलाया गया. इसी कारण वे यात्रा बीच में छोड़कर रवाना हो गए.


दूसरी ओर यह खबर है कि पदयात्रा के दौरान कन्हैया कुमार के बाउंसरों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी. कार्यकर्ता माला पहनाने और सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे थे. बाउंसर उन्हें रोक रहे थे. इसी दौरान कार्यकर्ता आफतानुर्रहमान से बाउंसर की कहासुनी हो गई. बाउंसर ने उन्हें धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया. इसके बाद कन्हैया खुद बीच में आए. बाउंसरों को हटाया और दोनों पक्षों को डांटा.


…और फिर कन्हैया को आया फोन


इसके थोड़ी देर बाद ही कन्हैया कुमार को फोन आया और वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए. पदयात्रा में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी, विधायक आबिदुर रहमान, जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन खान समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए.


उधर कन्हैया के अचानक लौटने को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. इसे लालू प्रसाद यादव की प्रेशर पॉलिटिक्स से भी जोड़ा जा रहा है. इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव है. कन्हैया की पदयात्रा से कांग्रेस को जमीन पर मजबूती मिल रही है. कार्यकर्ता सक्रिय हो रहे हैं. आरजेडी इसे चुनौती मान रही है. कन्हैया का उभरता कद तेजस्वी यादव के लिए खतरा बन सकता है. दोनों युवा नेता हैं.


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