पटना: सड़क बनाने में रिक्लेम एसफोर्टिंग पेवमेंट एक ऐसी तकनीक है, जिससे सड़क निर्माण की लागत आधी हो जाएगी. पुरानी और खस्ताहाल सड़कों को उखाड़कर उसी मटेरियल से उन्हें चकाचक कर दिया जाएगा. इस तकनीक के जरिए आरएपी मशीन में पुराने मटेरियल को डालकर उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने लायक बनाया जाता है. ये बातें पर्यावरण के अनुकूल तकनीक एवं कौस्ट इफेक्टिव तकनीक को समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने को कटिबद्ध इन्जीनियर्स फेडरेशन (पूर्वी) के उपाध्यक्ष और बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कही.


लागत घटकर हो जाएगी 28 से 30 लाख रुपये


उन्होंने बताया कि इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए शासन स्तर पर भी नीति बनाए जाने की जरूरत है. बता दें कि वर्तमान में विभाग को सिंगल लेन सड़क की लागत 80 से 82 लाख रुपये प्रति किमी की लागत पड़ती है. मगर सड़कों को खोद कर उनके मटेरियल से सड़क बनाए जाने से ये लागत घटकर 28 से 30 लाख रुपये हो जाएगी. कई राज्यों में इस तकनीक से सड़कों का निर्माण हो रहा है.


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पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा


डॉ. चौधरी ने आगे बताया कि पुरानी सड़क को उखाड़कर उसी सामग्री से सड़क बनाने से सिर्फ लागत ही कम नहीं होगी. दरअसल, इससे सड़कों के दोनों किनारों पर स्थित प्रतिष्ठानों और आवासों को भी लाभ मिलेगा. बार-बार डामरीकरण से सड़कों का तल किनारों के तल से ऊपर उठ जाता है, जिससे बरसात के दिनों में आसपास के घरों और प्रतिष्ठानों में पानी भर जाता है. सड़कों को खोदकर उन्हीं के मटेरियल से जब दोबारा बनाया जाएगा तो उनका तल समान रहेगा. व्यापक इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.


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