Ramlala Pran Pratishtha: 'जो लोग अयोध्या नहीं जा सकते वे अपने घरों को...', सीएम विष्णु देव साय की प्रदेशवासियों से अपील
Ramlala Pran Pratishtha: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ में जश्न का माहौल है. सीएम विष्णु देव साय ने इस अवसर पर लोगों से घरों को सजाने-संवारने की अपील की है.
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने राज्य की जनता से अपील की है कि वे रामलला (Ramlala) की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन अपने घरों को फूलों और दीपक से सजाएं और रामलला का स्वागत करें. सीएम साय ने कहा, ''मैंने लोगों से यही अपील की है कि आप लोग अपने-अपने घरों को फूलों और दीपों से सजाएं. जो लोग अयोध्या नहीं पहुंच पा रहे हैं वे जहां है वहीं से रामलला का स्वागत करें. ''
समाचाऱ एजेंसी एएनआई से बातचीत में सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और प्रभु श्रीराम का गहरा नाता है. सीएम साय ने कहा, ''छत्तीसगढ़ एक जनजाति बहुल प्रदेश है इसलिए यहां उत्साह है. छत्तीसगढ़ और प्रभु श्रीराम का गहरा नाता है. प्रभु श्रीराम की माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था. इसलिए छत्तीसगढ़ के लोग भगवान राम को अपना भांजा मानते हैं. यहां भांजे के पांव छूने की परंपरा है.''
प्रभु श्रीराम को भी था ननिहाल से प्रेम- सीएम साय
सीएम साय ने कहा, ''सभी को अपने ननिहाल से विशेष प्रेम होता है. उनका प्रेम इसी से स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने ननिहाल के जंगलों में ही वनवास काटने का निर्णय किया था. 14 वर्ष के वनवास में 10 वर्ष प्रभु राम ने छत्तीसगढ़ के जंगल में ही गुजारे. तब यह क्षेत्र दंडाकारण्य कहलाता था. माता शबरी की कथा भी छत्तीसगढ़ की है. यह जनजाति आज भी छत्तीसगढ़ में निवास करती है.''
सौभाग्यशाली हूं भगवान श्रीराम के ननिहाल का निवासी हूं- सीएम साय
सीएम साय ने कहा, ''छत्तीसगढ़ के लोगों और श्रीराम का रिश्ता भक्त और भगवान से बढ़कर है. हम राम की स्मृतियों को संरक्षित करेंगे. राम गमन पथ का विकास किया जाएगा और एक हजार किलोमीटर की शक्तिपीठ परियोजना पर काम किया जा रहा है. इस परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठों को जोड़ा जाएगा और उनका विकास किया जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की जाएगी.'' सीएम साय ने कहा, ''मैं जनजाति समाज से हूं. प्रभु राम मेरे ईष्ट हैं. मुझपर श्रीराम की कृपा रही है. भगवान राम के ननिहाल का निवासी हूं. भारत भूमि में जन्मा हूं. मैं भाग्यशाली हूं कि उस दिन को देख पा रहा हूं. जनजाति समाज उन्हें अपना ही सदस्य मानता है.''
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