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Surajpur: कोरोनाकाल में हुआ भारी नुकसान! फिर यूट्यूब से ऐसे बदल गई ईंट-भट्ठे व्यवसायी की किस्मत, अब लाखों में होती है कमाई

Chhattisgarh: कोरोना महामारी के दौरान ईंट-भट्ठे व्यवसायी बाबूलाल को नुकसान उठाना पड़ा हालांकि आज वे लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. साथ ही वे युवाओं को भी इसके लिए प्रोत्साहित करते हैं.

Surajpur Latest News: गांव में एक कहावत है कि 'पढ़ाई लिखाई कर कुछ नहीं मिला तो खेती बाड़ी तैयार है', ये कहावत पढ़ लिखकर भी कुछ नहीं बन पाने वाले युवाओं के लिए है. लेकिन छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक युवा ईंट भट्ठा व्यवसायी की किस्मत कोरोना और यूट्यूब ने बदल दी. अब ईंट भट्ठे का व्यवसायी खेती किसानी में हाथ आजमाकर 30 एकड़ जमीन में सब्जी की खेती कर महीने 1.50 लाख रुपए से ज्यादा कमाई कर रहा है. मतलब एक साल में करीब 20 लाख रुपए का फायदा हो रहा है.

इस सीजन में 30 लाख रुपए कमाई होने की संभावना 

वहीं इस वर्ष किसान ने तरबूज, बैगन, खीरा, लौकी की जबरदस्त पैदावार की है, जिससे इस सीजन में 30 लाख रुपए कमाई होने की संभावना जताई है. खास बात है कि खेती किसानी में फायदा मिलने के बाद किसान ने गांव के कई महिला-पुरुषों को अपने कृषि फार्म में रोजगार भी दिया है. वहीं सब्जियों की बंपर पैदावार होने पर उसे तोड़ने के लिए 40-45 मजदूर लगाने पड़ते हैं. इसके साथ ही इस किसान से प्रेरणा लेकर क्षेत्र के 5 से 10 युवा भी खेती को मुख्य रोजगार के तौर पर लेकर आधुनिक तरीके से खेती कर लाभ कमा रहे हैं.

दरअसल, जिला मुख्यालय सूरजपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर में रामनगर गांव है. यहां बाबूलाल यादव नाम के किसान हैं. जो पिछले 10-15 साल से ईंट भट्ठे का कारोबार करते थे, लेकिन जब कोरोना वायरस आया तो ईंट भट्ठे से लाभ मिलना कम हो गया. इसके बाद बाबूलाल ने रेण नदी के किनारे गांव के ही लोगों की 30 एकड़ जमीन लीज पर लिया और वैज्ञानिक तरीके से खेती करना शुरू किया.

किसान बाबूलाल यादव ने बताया कि मई 2022 में उन्होंने खेती किसानी का काम शुरू किया. शुरुआत में उन्हें ड्रिप, बांस, बल्ली और अन्य समानों के लिए 40 से 45 लाख रुपए लागत लगी. पहले उन्होंने टमाटर, लौकी की खेती की. जिसमें अच्छा मुनाफा हुआ.

लगभग 20 लाख रूपये की आमदनी हुई. इस फायदे के बाद उत्साह से लबरेज किसान बाबूलाल ने अब अपने फार्म हाउस में खीरा, बैगन, लौकी, तरबूज लगाया है. इसमें खीरा तोड़ने का काम शुरू हो गया है. वहीं बैगन की पैदावार भी जबरदस्त है. उन्होंने बढ़िया पैदावार के पीछे की वजह बताया कि ग्राफ्टिंग खेती. इस पद्धति से खेती करने पर अच्छा फायदा होता है. फसलों का जीवन ज्यादा बढ़ जाता है.

यूट्यूब से कैसी मिली मदद?

किसान बाबूलाल यादव ने बताया कि उन्होंने ईट भट्ठा के कारोबार से फायदा कम होने पर फ्री टाइम में यूट्यूब में खेती किसानी से संबंधित वीडियो देखा करते थे. जिसके बाद उनके मन में खेती करने का ख्याल आया और तब से यह काम शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि उनके फार्म हाउस में सबसे मजबूत पहलू ड्रिप सिस्टम है. इस पद्धति से खेती करने पर पाइप के माध्यम से पौधों के जड़ों तक पानी और खाद्य बड़ी आसानी से पहुंच जाता है.

वहीं इसके लिए ज्यादा मजदूर रखने की आवश्यकता नहीं होती है. इससे काफी ज्यादा धन का बचत होता है, और एक एक पौधा में पानी डालने का मेहनत नहीं करना पड़ता. उन्होंने 30 एकड़ में लगाए फल, सब्जियों के पानी डालने के सवाल पर कहा कि फार्म हाउस में एक तालाब बनवाया गया है, जिसमें बगल से होकर गुजरने वाली रेण नदी से पानी भरा जाता है और फिर तालाब के पानी की सप्लाई सब्जियों में की जाती है.

वर्तमान समय में गांव के युवा हो या बुजुर्ग, कई लोग इंटरनेट का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इंटरनेट का उपयोग अपने मनोरंजन के लिए करते देखे जाते हैं. लेकिन बाबूलाल यादव ने इंटरनेट का भरपूर फायदा उठाया और खेती किसानी के लिए यूट्यूब और गूगल को ही अपना गुरु मान लिया. और नेट पर खेती किसानी को लेकर बताए निर्देश का पालन करते हुए वैज्ञानिक पद्धति से खेती की शुरुआत की.

उन्होंने बताया कि अब खेती किसानी से संबंधित कोई समस्या होती है तो वे गूगल और यूट्यूब से ही समाधान सर्च कर सलाह लेते हैं और उसी के बताए अनुसार कदम बढ़ाते हैं. उनका कहना है कि वैज्ञानिक खेती करने से अब तक उन्हें लगभग 20 लाख रुपए इनकम हुई है, और इस बार 30 लाख रुपए पहुंचने की संभावना है.

बाबूलाल यादव ने बताया कि 30 एकड़ में से 14 एकड़ में खीरे की खेती और 10 एकड़ में तरबूत की खेती की गई है. वर्तमान में हर दिन एक दो गाड़ी खीरा तोड़कर मार्केट में बेचा जा रहा है. वहीं अप्रैल के लास्ट दिनों में तरबूज भी तैयार हो जाएगा. इसके अलावा बैगन की ग्राफ्टिंग तरीके से खेती की गई है जिसमें से हर दिन तीन से चार बोरी फल निकल रहे हैं. वर्तमान में प्रति एकड़ 30 टन खीरा निकल रहा है, 20 से 22 टन प्रति एकड़ में तरबूज निकलेगा.

इस राज्यों में होती है सप्लाई

उन्होंने बताया कि उन्हें ज्यादा मार्केट नहीं जाना पड़ता है, सब्जी व्यापारी उनके फार्म हाउस में ही आकर सब्जी ले जाया करते है. उनके फार्म की सब्जियां यूपी, बिहार, एमपी सहित छत्तीसगढ़ सरगुजा और बिलासपुर संभाग के कई जिलों तक जाती है. बाबूलाल यादव ने कहा कि खीरा से ज्यादा फायदा है, क्योंकि यह 35 से 40 दिन में फल दे देता है. उन्होंने रोजगार की तलाश करते करते थक गए युवाओं से भी अपील किया कि अगर कोई ऑप्शन नहीं मिल रहा है तो निराश नहीं होना चाहिए. जमींन से जुड़कर भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है. उन्हें निराश नहीं होना चाहिए.

खेती किसानी से लाखों रूपए कमा रहे किसान बाबूलाल यादव की चर्चा क्षेत्र में समृद्ध किसान के रूप में होती है. क्योंकि उनके मैनेजमेंट सिस्टम की वजह से उनके फार्म में हर दिन 20 से 25 मजदूर काम करते हैं और सबको मेहनत का फायदा मिलता है. वहीं क्षेत्र के युवा भी अब उनके खेती के तरीके को देखकर प्रेरणा ले रहे और 5 से 7 युवाओं ने वैज्ञानिक तरीके से खेती करना भी शुरू कर दिया है. जिसका उन्हे लाभ मिला रहा है. वर्तमान में किसान बाबूलाल यादव के पास खेती से जुड़े वो हर उपकरण मौजूद हैं, जिनकी आवश्यकता हर किसान को होती है. इनके पास खुद का ट्रैक्टर, रोटावेटर, हल, कोपर मौजूद है, जो इनके लिए सहायक साबित हो रहा है.

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