Sukma News: सुकमा में 2008 में हुए नरसंहार का 20 गांव के लोग कर रहे विरोध, सामने रखी ये सात मांगें
Chhattisgarh News: सिंगाराम इलाके में साल 2008 में घटित नरसंहार के विरोध में करीब 20 से ज्यादा गांव के ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्होंने मुआबजा देने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी की है.
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Sukma News: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सिंगाराम इलाके में साल 2008 में घटित नरसंहार के विरोध में 7 पंचायत के करीब 20 से ज्यादा गांव के ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सैकड़ों की संख्या में बैठे ग्रामीणों ने उक्त घटना में मारे गए 18 ग्रामीणों के परिजनों को एक- एक करोड़ रूपये मुआवजा और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ कुल 7 मांगे रखी है. ग्रामीण केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आवाज बुलंद कर रहे हैं. पिछले 5 दिसंबर से ग्रामीणों की भीड़ सिंगाराम में प्रदर्शन कर रही है, और बताया जा रहा है आने वाले जून-जुलाई माह तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
ग्रामीणों ने रखी अपनी मांग
मूलवासी बचाओ मंच और नरसंहार विरोध कमेटी के बैनर तले सिंगाराम में कोंटा ब्लॉक के पालाचलमा, बुर्कालंका, सिंगाराम, गंगलेर, कोरसगुड़ा और बट्टेगुड़ा के सैकड़ों ग्रामीण राशन-पानी लेकर पिछले 15 दिनों से न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि साल 2008 में सुरक्षाबलों ने गांव के 18 ग्रामीणों को नक्सली बताकर गोली मार दी थी, मामले की जांच भी हुई लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने मांग की है कि मारे गए सभी ग्रामीणोंं को सरकार एक-एक करोड़ रूपये प्रति परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, साथ ही इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए. इसके अलावा बस्तर में तैनात सभी पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कम्पों को हटाया जाए, इसके अलावा एड्समेटा सारकेगुड़ा टीएमटीडी जांच आयोग की सिफारिश पर अमल किया जाए. बस्तर में पांचवी अनुसूची पैसा ग्राम सभा के अधिकारों को लागू किया जाए, आम आदिवासी ग्रामीणों को नक्सली के नाम पर जेल में ठूसना बंद किया जाए, और हर गांव में छात्रावास सहित स्कूल, अस्पताल, शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध किया जाए.
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार 8 जनवरी 2008 में सुकमा जिले में सलवा जुडूम प्रभावशील था. इस दौरान सिंगारम इलाके में गश्त पर निकले एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) के जवानों द्वारा गांव के 7 नाबालिग समेत 18 आदिवासियों को नक्सली बताकर कथित रूप से गोली मार दी गई थी. सुरक्षाबलोंं की डर से ग्रामीणों ने सभी शव को गांव के पास ही दफना दिए. सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार टीम के पास मामला पहुंचने के बाद सिंगाराम की हत्याओं की मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया गया था. पीड़ितों की गवाही और आरोपी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज करने प्रशासनिक अफसरों की टीम मौके पर पहुंची थी. घटना के संबंध में कोई वास्तविक जांच नहीं की गई और न ही कोई चार्जशीट तैयार किया गया.
घटना में इन ग्रामीणों की हुई थी मौत
सिंगारम नरसंहार में दंतेश्पुरम के वेको बण्डी, मुचाकी देवा, वेको पोज्जे, एमला सुकड़ा, मड़कम हिड़मा, माड़वी देवा, वेको जोगा, मुचाकी गंगा, मैलासुर के वेट्टी हड़मा, कोराजगुड़ा के माड़वी कोना, माड़वी भीमा, एमला हड़मा, सिंगारम का मलम सीती, कारम लच्छा और कारम मुत्ता शामिल थे, फिलहाल ग्रामीणों ने जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है, इधर ग्रामीणों के इस आंदोलन और उनकी मांग को लेकर अब तक स्थानीय जनप्रतिनिधि और शासन प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है.
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