Surajpur News: पशु पालकों का भविष्य संवारने के उद्देश्य से स्थापित पिल्खा क्षीर (Pilkha Ksheer) प्रबंधन की लापरवाही के कारण अब अंतिम सांसें गिन रहा है. संस्थान की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है. संस्थान पिछले चार-पांच महीनों से दूध उत्पादकों की उधार राशि का भी भुगतान नहीं कर पा रहा है. सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत सिलफिली सहित आसपास के गांवों में सब्जी और दूध का पर्याप्त उत्पादन होता है. सब्जी की खेती के साथ ही बड़ी संख्या में किसानों ने पशुपालन को भी अपनी आजीविका बनाया है.


पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ ही दूध की जरूरतें पूरा करने के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायत सिलफिली में पिल्खा क्षीर की स्थापना की थी. पिल्खा क्षीर के संचालन के लिए पशुपालकों की सहकारी समिति गठित की गई है, जो पिल्खा क्षीर का संचालन करती है. गठन के बाद सुचारू संचालन के लिए प्रारंभ में समिति की जिम्मेदारी पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई. 


शुरूआत में बढ़ने लगा था कारोबार
प्रारंभ में योजनाबद्ध तरीके से आपूर्ति की व्यवस्था की गई. दूध उत्पादक किसानों को समय से भुगतान करने के साथ ही प्रबंधन डेयरी प्रोडक्ट्स को बढ़ाने में भी रूचि लेने लगा. पिल्खा क्षीर में खोआ, पनीर, घी और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनने लगीं, जिनकी आपूर्ति सरगुजा संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में होने लगी. पिल्खा क्षीर में दूध की आवक भी बढ़ने लगी. दैनिक आवक 1600 लीटर से अधिक पहुंच गई. एनएच पर सफर करने वाले यात्रियों के साथ ही अन्य क्षेत्रों के लोग महिला समूह द्वारा संचालित आउटलेट से डेयरी प्रोडक्ट खरीदने लगे. 


नए-नए प्रयोगों ने किया यह हाल
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी डेयरी को उत्कृष्ठ बनाने के नाम पर नए-नए प्रयोग करते रहे. धीरे-धीरे स्थिति यह हुई कि प्रबंधन की लापरवाही से अधिकारियों ने निजी संस्थानों को उधार में लाखों के डेयरी प्रोडक्ट बेच दिए, जिसका भुगतान दो साल बाद भी नहीं मिल पाया है. भुगतान के अभाव में पिल्खा क्षीर दूध उत्पादकों की बकाया राशि का भुगतान भी नहीं कर पा रहा है. इस कारण दूध उत्पादक किसान अब डेयरी से किनारा करते जा रहे हैं.


22 लाख के ऊपर पहुंचा बकाया
कोरोना काल में खपत प्रभावित होने के कारण डेयरी पशु पालकों से एक समय ही दूध खरीदता था. कोरोना काल तक अधिकतम दो महीने के विलंब से पशुपालकों को पाक्षिक भुगतान किया जाता था. अब हालत यह है कि अगस्त 2022 के बाद डेयरी प्रबंधन काफी मुश्किलों के बाद हर महीने एक पखवाड़े का ही भुगतान कर पा रहा है. प्रबंधन द्वारा कृषको को 6 जनवरी के बाद 24 फरवरी को 15 दिन का भुगतान किया गया है. अधिकारी निजी संस्थानों के पास 22 लाख की राशि बकाया होने की बात कर रहे हैं. इधर, पशुपालकों का बकाया बढ़कर 40 लाख पहुंच गया है. अगस्त के बाद दूध उत्पादको को आधी राशि का भुगतान नहीं मिला है. वित्तीय स्थिति चरमराने के कारण अधिकांश पशुपालकों ने अपने पशुओं को बेच दिया है. जो पशु पालन कर रहे हैं, वे स्वयं दूध का विक्रय कर रहे हैं।


200 लीटर तक सिमटा उत्पादन
भुगतान के अभाव में बेहद कम संख्या में किसान डेयरी को दूध की आपूर्ति कर रहे हैं. डेयरी की सप्लाई चेन भी चरमरा गई है. पहले जहां चार पहिया वाहनों से डीलरों को दूध की आपूर्ति की जाती थी, अब बाइक से की जा रही है. अधिकारी डेयरी प्रबंधन की खामियों का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं. इससे डेयरी का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है. प्रबंधन सहकारी समिति के माध्यम से होने के कारण बकाया भुगतान के लिए कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. इसके पूर्व कभी पिल्खा क्षीर को ऐसे दुर्दिन का सामना नहीं करना पड़ा था.


बोले अधिकारी, ठंड के कारण उत्पादन में कमी
पिल्खा क्षीर के नोडल अधिकारी मनीष सिन्हा का कहना है कि ठंड के कारण दूध उत्पादन में कमी आई है. कोरोना काल के दौरान संस्थान की बकाया राशि की वसूली कलेक्टर के निर्देशन में की जा रही है. उधारी बढ़ने के कारण भुगतान में परेशानी हो रही है. उत्पादकों को हाल ही में एक पखवाड़े का भुगतान किया गया है.


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