Chhattisgarh: दोनों हाथों से दिव्यांग है सरगुजा का महेश, कमियों को तमाचा मारते हुए पैरों से लिखता है, दे रहा 12वीं की परीक्षा
Sarguja Disabled Student: दिव्यांग महेश में पढ़ाई के प्रति इतनी ललक है कि वह कक्षा पहली से अब तक किसी कक्षा में फेल नहीं हुआ है. उसने सभी परीक्षाओं में अच्छे अंक अर्जित किए हैं.

Surguja News:आदमी की जिंदगी में कई बार कुछ पल ऐसे आते हैं, जब वे टूट जाते हैं. इसके बाद उन्हें जिंदगी जीने का कोई मकसद नजर नहीं आता. लेकिन हमारे समाज में ही कुछ लोग ऐसे हैं, जो चुनौतियों को अवसर में बदलना जानते हैं. विपरीत परिस्थितियों में भी कुछ ऐसा करके दिखा देते हैं कि औरों के लिए वो प्रेरणा का स्त्रोत बन जाते हैं. ऐसा ही काम एक दिव्यांग स्टूडेंट ने किया है. उसका एक हाथ नहीं है. दूसरा हाथ है तो वह भी अविकसित. इन सबके बाद भी यह स्टूडेंट पैर से कॉपी लिख रहा है, लिखावट भी ऐसी है, जैसे कोई आदमी हाथ से लिखता हो.
बचपन से दिव्यांग है महेश सिंह
दरअसल, सरगुजा ज़िला मुख्यालय अम्बिकापुर से सटे डिगमा का 17 वर्षीय महेश सिंह बचपन से दिव्यांग हैत्र उसका एक हाथ नहीं है, जबकि दूसरा हाथ अविकसित है. इसके बाद भी ऐसा जुनून कि उसने अब तक की पढ़ाई और परीक्षा पैरों से लिख कर पूरी की है. महेश डिगमा के स्थानीय हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं का छात्र है. वर्तमान में महेश 12वीं बोर्ड की परीक्षा लिख रहा है और भविष्य में शिक्षक बनना चाहता है.
मिसाल पेश कर रहा है महेश सिंह
"मन में कुछ कर गुजरने की चाहत और जज्बा हो तो कोई भी अशक्तता बाधा नहीं बन पाती" महेश ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिया है. अम्बिकापुर का बेटा अपने बेमिसाल हौसले और जज्बे के कारण आज के समय में अच्छे खासे हाथ पैर वाले बच्चे ढंग से पढ़ाई नहीं कर पाते और अपने माता-पिता का सिरदर्द बन जाते हैं. ऐसे लोगों के लिए मिसाल पेश कर रहा है. वहीं महेश की पढ़ाई के प्रति ललक को देखकर उसके परिवार का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है.
कठिन नहीं लग रही परीक्षा
अक्सर दिव्यांग लोगों को देखकर कोई हंसता, तो कोई सहारा दे देता है. लेकिन, महेश ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी कमियों को भी तमाचा मारा है. बिना हाथ के, पैर से लिखकर 11वीं कक्षा तक सफ़र करने वाले महेश के जज्बे की दास्तां दुनिया के हर स्टूडेंट के लिए मिसाल है. महेश ने बताया कि उसका 12वीं का एग्जाम अच्छा जा रहा है. परीक्षा कठिन नहीं लग रही है. महेश की पढ़ाई के प्रति ललक को देखकर उनके परिवार के लोग उसका भरपुर सहयोग कर रहे हैं. महेश परिवार के साथ खेती किसानी के काम में भी सहयोग करता है.
अब तक नहीं हुआ अनुतीर्ण
बता दें कि दिव्यांग महेश में पढ़ाई के प्रति इतनी ललक है कि वह कक्षा पहली से अब तक किसी कक्षा में फेल नहीं हुआ है. उसने सभी परीक्षाओं में अच्छे अंक अर्जित किए हैं. परीक्षा की हर चुनौती को पार करते हुए महेश अब 12वीं बोर्ड की परीक्षा कुशलतापूर्वक दे रहा है. महेश ने बताया कि वह तीन घंटे में अपने पेपर कंप्लीट कर ले रहा है.
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