Delhi Assembly: दिल्ली में नई सरकार का पहला विधानसभा सत्र होगा हंगामेदार, इन मुद्दों पर एक दिखेगी पक्ष-विपक्ष में तकरार
Delhi Assembly Session: दिल्ली विधानसभा का पहला सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं. बीजेपी शीशमहल घोटाला और यमुना सफाई पर विपक्ष को घेरेगी. वहीं, विपक्ष महिला सम्मान राशि का मुद्दा उठाएगा.

Delhi Assembly Session: दिल्ली में नई सरकार का पहला विधानसभा सत्र हंगामेदार रहने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी विधायक दल की बैठक में विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार की गई है. सरकार ने तय किया है कि वह शीशमहल घोटाला, शराब घोटाला, यमुना सफाई, भ्रष्टाचार और कैग रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर विपक्ष को कटघरे में खड़ा करेगी.
बीजेपी ने यह भी तय किया है कि विपक्ष के हर सवाल का जवाब पूरी तैयारी के साथ दिया जाएगा, ताकि किसी भी मुद्दे पर विपक्ष को हावी होने का मौका न मिले. सरकार चाहती है कि विपक्ष पर राजनीतिक और प्रशासनिक विफलताओं का दबाव बनाया जाए, जिससे जनता में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हो.
विपक्ष ने भी बनाई सरकार को घेरने की योजना
विपक्ष भी इस सत्र में सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रहा है. महिला सम्मान राशि, बीजेपी की कथित वादाखिलाफी और झूठे वादों जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश होगी. विपक्ष का कहना है कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन वादों को पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है.
विपक्ष यह भी आरोप लगा सकता है कि बीजेपी ने महिला सुरक्षा और कल्याण के लिए जो वादे किए थे, वे अभी तक केवल कागजों तक ही सीमित हैं. इसके अलावा, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सरकार से सवाल किए जा सकते हैं.
तीन दिवसीय सत्र में जोरदार बहस के आसार
नई सरकार के पहले तीन दिवसीय विधानसभा सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिल सकता है. दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के साथ सदन में उतरेंगे और एक-दूसरे को घेरने की पूरी कोशिश करेंगे.
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली की राजनीति काफी गर्म रही है. शराब घोटाले और यमुना सफाई जैसे मुद्दों पर बीजेपी लगातार आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमलावर रही है. अब सत्ता परिवर्तन के बाद, बीजेपी को उम्मीद है कि वह इन मुद्दों को फिर से उठाकर विपक्ष को बैकफुट पर ला सकती है.
वहीं, विपक्ष इस कोशिश में रहेगा कि जनता के मुद्दों को उठाकर सरकार को जवाब देने पर मजबूर किया जाए. देखना यह होगा कि इस हंगामेदार सत्र में कौन किस पर भारी पड़ता है और जनता के लिए क्या नए फैसले लिए जाते हैं.
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