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तिहाड़ में शिक्षा की नई रोशनी: कैदी बना रहे उज्जवल भविष्य, सर्टिफिकेट कोर्स की बढ़ी लोकप्रियता

Tihar Jail: तिहाड़ जेल शिक्षा का केंद्र बन रही है, जहां कैदी अपनी गलतियों को सुधारने के लिए पढ़ाई का सहारा ले रहे हैं. जेल प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान और अध्ययन केंद्रों से कैदी प्रेरित हो रहे हैं.

Tihar Jail News: तिहाड़ जेल, जिसे देश की सबसे सख्त जेलों में से एक माना जाता है, अब कैदियों के लिए शिक्षा का नया केंद्र बनता जा रहा है. जेल की ऊंची दीवारों के पीछे कैदियों की सोच बदल रही है. वे अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए किताबों का सहारा ले रहे हैं और शिक्षा के जरिए एक नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.

जेल प्रशासन भी इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के प्रयास कर रहा है. जागरूकता अभियान, काउंसलिंग और स्टडी सेंटर के माध्यम से कैदियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस पहल का असर भी दिख रहा है. वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में विभिन्न कोर्सों में दाखिला लेने वाले कैदियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

शिक्षा की ओर बढ़ते कदम
शिक्षा की चाह रखने वाले कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 2024 में दसवीं कक्षा में 747 कैदियों ने दाखिला लिया, जबकि 2023 में यह संख्या मात्र 373 थी. यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. इसी तरह, 12वीं कक्षा में नामांकन भी बढ़ा है. वर्ष 2023 में 41 कैदी थे, जबकि इस साल 47 कैदी इस दिशा में आगे बढ़े हैं.

इसके अलावा, व्यावसायिक और तकनीकी कोर्सों में भी कैदियों की दिलचस्पी बढ़ी है. फूड एंड न्यूट्रिशन कोर्स में 421 कैदियों ने दाखिला लिया, जो 2023 में 280 था. यह 50% की बढ़ोतरी दर्शाता है. ह्यूमन राइट्स कोर्स में 37 कैदियों ने प्रवेश लिया, जबकि 2023 में यह संख्या केवल 15 थी. कुछ विशेष कोर्सों में भी रुचि देखने को मिली है. इंटरनेशनल बिजनेस डिप्लोमा में 13 कैदियों ने दाखिला लिया, जबकि 2023 में यह संख्या केवल 2 थी. 

साइबर लॉ डिप्लोमा में भी कैदियों की रुचि बढ़ी है. 2024 में 8 कैदियों ने इस कोर्स में दाखिल लिया, जबकि 2023 में इस कोर्स में कोई भी नहीं था. हालांकि, ग्रेजुएशन कोर्स में नामांकन थोड़ा कम हुआ है. 2023 में 66 कैदियों ने ग्रेजुएशन में दाखिला लिया था, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 33 रह गई है.

छोटे कोर्सों की ओर बढ़ता झुकाव: रोजगार की उम्मीदें
जेल अधिकारियों के अनुसार, कैदी छोटे-छोटे सर्टिफिकेट कोर्सों को अधिक पसंद कर रहे हैं. इसका कारण यह है कि ये कोर्स उन्हें जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार के अवसर प्रदान कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, फूड एंड न्यूट्रिशन कोर्स करने वाले कैदी आगे चलकर खाने-पीने से जुड़ा कोई छोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं.

इसके अलावा, जेल प्रशासन पढ़े-लिखे कैदियों को अन्य कैदियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है. कई कैदी इस मुहिम में शामिल होकर अपने साथी कैदियों को शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. इससे जेल में एक सकारात्मक माहौल बना है और कैदी मानसिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं.

कैदियों की शैक्षिक स्थिति पर विशेष ध्यान
तिहाड़ जेल में आने वाले हर नए कैदी की शिक्षा का रिकॉर्ड रखा जाता है. जब कोई नया कैदी आता है, तो उससे उसकी शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में पूछा जाता है और यदि वह पढ़ाई करना चाहता है, तो उसे आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाते हैं. 2024 के आंकड़ों के अनुसार, तिहाड़ जेल में 5,312 कैदी पूरी तरह अनपढ़ थे.

7,872 कैदियों ने दसवीं से कम पढ़ाई की थी, जबकि 4,271 कैदियों की शिक्षा दसवीं से ऊपर लेकिन ग्रेजुएशन से कम थी. 1,642 कैदी ग्रेजुएट थे और 284 कैदियों ने पोस्ट ग्रेजुएशन किया हुआ था. इसके अलावा, 155 कैदियों के पास टेक्निकल डिग्री भी थी.

अनपढ़ कैदियों पर विशेष फोकस: नई पहलें और सुविधाएं
तिहाड़ जेल प्रशासन का मुख्य फोकस उन कैदियों पर है, जो पूरी तरह अनपढ़ हैं. उन्हें बुनियादी शिक्षा प्रदान करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों के तहत, कैदियों को गिनती, अक्षर ज्ञान और लिखने की ट्रेनिंग दी जाती है. अधिकारियों का कहना है कि 90-95% अनपढ़ कैदियों को पढ़ाई की बुनियादी शिक्षा दी जा चुकी है. 

जेल में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है. इसके अलावा, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से कैदियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की सुविधा दी जा रही है.

2024 में 771 कैदियों ने परीक्षा दी, जो 2023 में 521 थी. यह दर्शाता है कि अब अधिक कैदी शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं. जेल में 33 शिक्षक नियमित रूप से कैदियों को पढ़ाने आते हैं और उनकी पढ़ाई में सहायता करते हैं.

जेल की फैक्ट्रियों में प्रशिक्षण: हुनर के साथ रोजगार की तैयारी
शिक्षा के साथ-साथ, तिहाड़ जेल में कैदियों को विभिन्न प्रकार के रोजगारपरक कौशल सिखाए जा रहे हैं. जेल की फैक्ट्रियों में कैदियों को कढ़ाई, सिलाई, बढ़ईगिरी, पेंटिंग और अन्य व्यावसायिक कार्यों में प्रशिक्षित किया जा रहा है. इससे उन्हें जेल से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी.

रिहाई के बाद भी रोजगार की सुविधा: प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन
तिहाड़ जेल प्रशासन कैदियों के पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. जेल महानिदेशक सतीश गोलचा के अनुसार, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से कैदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश की जा रही है. 

इसके लिए प्लेसमेंट ड्राइव का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न कंपनियां कैदियों को रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं. जेल प्रशासन का उद्देश्य है कि जब कैदी अपनी सजा पूरी करके बाहर आएं, तो वे अपराध की दुनिया से दूर रहकर एक सम्मानजनक जीवन जी सकें.

शिक्षा से बदलती जिंदगी
तिहाड़ जेल में शिक्षा और प्रशिक्षण के इन प्रयासों से यह साफ है कि जेल केवल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का भी केंद्र बन रही है. कैदियों की बढ़ती शैक्षिक रुचि और जेल प्रशासन की पहल से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे बाहर निकलकर समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे. 

शिक्षा की यह रोशनी तिहाड़ की दीवारों के अंदर तो जगमगा रही है, लेकिन इसका असर बाहर की दुनिया में भी दिखेगा, जब ये कैदी नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ाएंगे.

अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.

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