500 रुपये रिश्वत लेना पड़ा महंगा, 6 साल बाद रिटायर्ड कांस्टेबल को मिली 5 साल की सजा, 20 गुना जुर्माना भी लगा
Gujarat News: मोरबी जिले में एक रिटायर पुलिस कांस्टेबल को कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई है और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. आरोपी को जेल भेज दिया गया है.
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Gujarat News: गुजरात के मोरबी जिले में 61 वर्षीय सेवानिवृत पुलिस कांस्टेबल को कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई है. दरअसल, साल 2014 के रिश्वतखोरी के एक मामले में पुलिसकर्मी को दोषी पाया गया, जिसको देखते हुए कोर्ट ने उसे 5 साल की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
कॉन्स्टेबल रिटायरमेंट से पहले मालिया पुलिस थाने में तैनात था जहां उसने पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये की रिश्वत ली थी. इस दौरान कांस्टेबल को एसीबी ने रंगे हाथों पकड़ लिया था. पुलिस कांस्टेबल अमरत मकवाना तीन साल पहले ही पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके है. उन्हें सजा मिलने के बाद अब जेल भेज दिया गया है.
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूरा मामला 17 मार्च 2014 का है. शिकायतकर्ता मनोज की भाभी पूजा को अपने पति के पास अफ्रीकी देश में जाना था. इसके लिए उसने पासपोर्ट बनने के लिए अप्लाई किया था. जिसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन भी होता है. मालिया पुलिस स्टेशन से 17 मार्च 2014 को पूजा को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया.
इस दौरान जब वो थाने पहुंची तो कांस्टेबल अमरत मकवाना ने उसके साइन करवा लिए और बाद में उसे 500 रुपये देने के लिए कहा. जब पूजा ने पूछा कि पासपोर्ट बनने के लिए उसने सारी फीस तो पहले ही भर दी तो अब पैसे क्यों दें. इसके बाद पूजा वहां से चली गई, लेकिन दूसरे दिन मकवाणा ने फिर पूजा को फोन किया और कहा कि पासपोर्ट बनवाना है तो 500 रुपये देने होंगे, नहीं तो पासपोर्ट नहीं बनेगा.
पूजा ने ठान लिया था कि वो पासपोर्ट बनवाने के लिए रिश्वत नहीं देगी. इसलिए पूजा के देवर मनोज ने एंटी करप्शन ब्यूरो को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद एसीबी ने जाल बिछाकर रिश्तखोर पुलिस कांस्टेबल को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. मामले को लेकर सरकारी वकील ने 7 मौखिक और 35 दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए. जिसके बाद कोर्ट ने मकवाना को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 5 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया.
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