हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को बजट से बड़ी उम्मीदें! विदेश से आने वाले सेब को लेकर ये है मांग
Himachal Pradesh News: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को बजट पेश करने वाली हैं. इस बजट से हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को भी बड़ी उम्मीदें हैं.

Union Budget 2025 for Himachal Pradesh: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश करेंगी. इस बजट से हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को भी बड़ी उम्मीदें हैं. हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानी की 5 हज़ार करोड़ रुपये की आर्थिकी है.
अब युवाओं में भी बागवानी को लेकर उत्साह के साथ रुचि बढ़ती हुई नज़र आ रही है. राज्य के युवा बागवान को व्यवसाय के तौर पर अपना रहे हैं. ऐसे में इन तमाम बागवानों को केंद्र सरकार के इस बजट से कई बड़ी उम्मीदें हैं.
सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग
हिमाचल प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि केंद्र सरकार के इस बजट से उन्हें कई बड़ी उम्मीदें हैं. वे चाहते हैं कि सेब के लिए इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और खादों पर जो GST लिया जाता है, उसे कम किया जाए.
इसके अलावा बागवानी उपकरणों पर भी GST घटाने की मांग है. हरीश चौहान के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से MIS का बजट घट जाने की वजह से भी बागवानों को नुकसान हो रहा है. बागवानों की यह भी मांग है कि बाहरी विदेश से आने वाले सेब पर आयात शुल्क को 100 फ़ीसदी किया जाए.
छोटे बागवानों तक पहुंचे सीधा फायदा
हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को 44 देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है. ऐसे में अगर सेब आयात करने पर शुल्क सौ फ़ीसदी होगा, तो इससे हिमाचल के बागवानों को फ़ायदा मिलेगा. युवा बागवान मोहित शर्मा का कहना है कि हर बार बजट से कई बड़ी उम्मीदें होती हैं. इस बार भी वे उम्मीद लगाए बैठे हुए हैं. राज्य के युवा बागवानी को व्यवसाय के तौर पर अपना रहे हैं.
ऐसे में वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से जो योजनाएं बागवानों के लिए लाई जा रही हैं, उसका सीधा फ़ायदा उन्हें मिले. छोटे बागवानों को बजट में की गई बातों का ग्राउंड पर फ़ायदा नहीं मिल पाता है. ऐसे में वे तो यही चाहेंगे कि बजट का में की गई घोषणाओं का सीधा फ़ायदा लोगों को मिल सके.
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