MP Election 2023: चुनाव से पहले कांग्रेस और BJP दोनों खेमों ने ही पूरा किया ये 'टास्क', किसको होगा फायदा?
MP Assembly Election 2023: राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि विकास यात्रा से BJP को अपने कामों का जितना लाभ नहीं हुआ, उससे ज्यादा जनता की नाराजगी का फीडबैक मिल गया. इसे एंटी इनकम्बेंसी भी माना जा रहा है.

Congress Vs BJP before MP Election 2023: मध्य प्रदेश की राजनीति (Politics) में अब कांग्रेस (Congress) की भारत जोड़ो यात्रा और बीजेपी (BJP) की विकास यात्रा की सफलता पर बहस चल पड़ी है.दोनों ही पार्टियां इन यात्राओं के बहाने विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले अपने-अपने मेगा इवेंट कर चुकी हैं. कहा जा रहा है कि अब दोनों ही राजनीतिक पार्टियां इनके फीडबैक के लिए पब्लिक ऑपिनियन और न्यूट्रल एजेंसियों की मदद ले रही हैं.
बीजेपी का विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा
पहले बात करते हैं, बीजेपी की हाल ही में संपन्न हुई विकास यात्रा की. बीजेपी ने 5 फरवरी को संत रविदास जयंती से अपनी विकास यात्रा की शुरुआत प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों से की थी. शिवराज सरकार और बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि विकास यात्रा में 22 दिन में 10 हजार करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया.
इस दौरान 38 हजार 506 लोकार्पण और 29 हजार 155 भूमि पूजन के कार्यक्रम हुए. 26 फरवरी को यात्रा के समापन तक इसमें रिकॉर्ड 118 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि पूजन किया गया. कहा जा रहा है कि 22 दिन में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने योजनाओं के लोकार्पण और भूमि पूजन का विश्व रिकॉर्ड बना लिया है.
प्रदेश में 12 दिन चली भारत जोड़ो यात्रा
अब बात करते हैं, पिछले साल निकली राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की. मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा का पड़ाव 12 दिन का रहा. मध्य प्रदेश में यात्रा के दौरान राहुल गांधी की इमेज बिल्डिंग के साथ ही सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर झुकाव देखा गया. आरएसएस और बीजेपी उनके निशाने पर रहे. दोनों संगठनों द्वारा जय सियाराम नहीं कहने की बात कहकर राहुल ने हिंदुत्व का कार्ड खेलने की कोशिश की. मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश भी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हुई. सॉफ्ट हिंदुत्व के साथ दलित-आदिवासी वर्ग पर भी फोकस किया गया.
क्या हैं दोनों यात्राओं के मकसद और परिणाम
अंत में चर्चा करते हैं, इन दोनों यात्राओं के मकसद और परिणाम की. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि विकास यात्रा से बीजेपी को अपने कामों का जितना लाभ नहीं हुआ, उससे ज्यादा उसे जनता की नाराजगी का फीडबैक मिल गया है. इसे सरकार के खिलाफ एन्टी इनकम्बेंसी भी माना जा रहा है. पीसीसी चीफ कमलनाथ ने तो दावा किया कि 160 से ज्यादा जगहों पर बीजेपी की विकास यात्रा का आम लोगों ने खुलकर विरोध किया. बीजेपी इससे इत्तेफाक नहीं रखती.
बीजेपी में विधायकों के खिलाफ नाराजगी की चर्चा
बीजेपी के अंदरखाने में चर्चा गर्म है कि अधिकांश विधायकों के खिलाफ जनता में जमकर नाराजगी है. बीजेपी ने जनता की नाराजगी झेल रहे विधायकों को साफ कह दिया है कि यदि उन्होंने जल्द अपनी इमेज नहीं सुधारी तो उन्हें अगले विधानसभा चुनाव में टिकट से हाथ धोना पड़ सकता है. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र दुबे कहते हैं कि विकास यात्रा बीजेपी के लिए तभी फायदे का सौदा हो सकेगी, जब वह जनता की नाराजगी दूर कर सके. इसके लिए उसे बड़ी संख्या में वर्तमान विधायकों के टिकट काटने का सख्त फैसला लेना पड़ सकता है.
भारत जोड़ो यात्रा में दिखा जर्बदस्त माहौल
इधर, कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के लिए मध्य प्रदेश में जबरदस्त माहौल देखा गया. यात्रा जहां से भी गुजरी लोगों ने उसे हाथों हाथ लिया. राहुल गांधी की इस यात्रा का लोगों ने खुले दिल से स्वागत भी किया. इस दौरान बीजेपी लगातार राहुल गांधी और उनकी भारत जोड़ो यात्रा के खिलाफ हमलावर रही. बीजेपी की छोटे से लेकर बड़े नेता लगातार यात्रा के खिलाफ बयान देते रहे. कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा बेहद प्लानिंग के साथ निकाली थी.
लेकिन, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अधिक समय होने के कारण अब लोग इस यात्रा को भूलते जा रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र दुबे कहते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा का लाभ राहुल गांधी की इमेज बिल्डिंग में जरूर हुआ, लेकिन मध्य प्रदेश में इसके राजनीतिक फायदे की उम्मीद कांग्रेस को कम रखनी चाहिए.
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