गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध से MP की मंडियों में पसरा सन्नाटा, व्यापारियों ने केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम
MP News: गेहूं के निर्यात (Wheat Export) पर प्रतिबंध लगने से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के व्यापारी परेशान हैं. व्यापारियों ने कड़े शब्दों में सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है.

Madhya Pradesh Ban On Wheat Export: केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार (BJP Government) को अनाज व्यापारियों ने कड़े शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है. मंडी प्रतिनिधियों ने कहा है कि अगर गेहूं के निर्यात (Wheat Export) पर प्रतिबंध नहीं हटाया जाएगा तो मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सभी 260 मंडियां अनिश्चितकाल के लिए बंद हो जाएंगी. केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. इसका खामियाजा मध्य प्रदेश के लाखों किसानों और हजारों व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है. उज्जैन (Ujjain) के अनाज तिलहन संघ के सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि सरकार को तुरंत प्रतिबंध हटाना चाहिए. मालवांचल के हजारों व्यापारियों का करोड़ों रुपया प्रतिबंध के कारण फंस गया है.
मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा
अनिल गर्ग ने बताया कि महाराष्ट्र और गुजरात के व्यापारियों के साथ-साथ कंपनियों को माल बेचा था. ये माल एक्सपोर्ट होना था लेकिन सरकार के प्रतिबंध के कारण एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से सौदे कैंसिल किए जा रहे हैं. इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश में 2 दिनों के लिए मंडी को बंद किया गया है. यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा.
इसलिए भुगतना पड़ रहा है किसानों को नुकसान
व्यापारियों के मुताबिक सरकार ₹2015 क्विंटल समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है जबकि व्यापारियों द्वारा 2100 से ₹2500 क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है. निर्यात बंद होने के बाद व्यापारियों द्वारा खरीदी भी बंद कर दी गई है जिसकी वजह से किसानों को अब समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचना पड़ेगा. व्यापारियों ने ये भी मांग उठाई है कि सरकार अगर किसान हितैषी है तो फिर समर्थन मूल्य में ₹300 तक का बोनस देना चाहिए. ऐसी स्थिति में भले ही निर्यात को बंद रखा जाए.
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