MP News: धार्मिक नगरी उज्जैन में अचानक जमीनों के भाव में उछाला गया है. इसकी एक दो नहीं बल्कि कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजह उज्जैन से विधायक और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी है. डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उज्जैन के आसपास विकास कार्यों को पंख लगने की उम्मीद है. इसी के चलते उज्जैन में जमीनों के दाम में पहले की तुलना में काफी इजाफा हो गया है.


धार्मिक नगरी उज्जैन में पहले भवन, भूखंड और कृषि भूमि के दाम इंदौर की तुलना में काफी कम थे. उज्जैन में भूखंड ₹6,00,000 से लेकर साइज, लोकेशन के मुताबिक बिक रहे थे मगर अब तुलनात्मक दृष्टि से मध्यम परिवार के लिए छोटी साइज के भूखंड के दाम 10 लाख से काम नहीं है.


प्रॉपर्टी व्यवसाय से जुड़े लोकेश आडवाणी के मुताबिक डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन संभाग में विकास कार्यों को लेकर जनता को काफी उम्मीद है. इन उम्मीदों पर वह खरा भी उतर रहे हैं.


इसी के चलते जमीनों के दाम में बढ़ोतरी हो रही है. उनका कहना है कि उज्जैन में इंदौर की तुलना में आज भी दाम काफी कम है. प्रॉपर्टी व्यवसाय से जुड़े अजय सिंह के मुताबिक वर्तमान में कृषि भूमि के दाम काफी बढ़ गए हैं, इसलिए इसका असर भूखंड और भवन पर भी पड़ रहा है. उज्जैन से मुख्यमंत्री होने की वजह से यहां पर चारों तरफ से मिलने वाले मार्ग फोरलेन हो रहे हैं. उज्जैन रहने की दृष्टि से भी काफी सुविधाजनक स्थान है इसी वजह से दाम में 30 से 35% तक की बढ़ोतरी हो रही है. 


सिंहस्थ के कारण 12 सालों में हो जाता है विकास


धार्मिक नगरी उज्जैन में हर 12 साल में सिंहस्थ महापर्व का आयोजन होता है, जिसके चलते करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु मेले में शामिल होने के लिए आते हैं. यही वजह है कि उज्जैन का हर 12 साल में सर्वांगीण विकास होता है. सिंहस्थ 2028 को लेकर अभी से तैयारी शुरू हो रही है. भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए सभी मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है.


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