Uddhav Thackeray On Aurangzeb: महाराष्ट्र की राजनीति में औरंगजेब की कब्र पर विवाद तूल पकड़ता जा रहा है. अब सामना में इस पर लेख प्रकाशित होने के बाद नए सिरे से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हा गया है. दरअसल, सामना के लेख में बताया गया है कि नव हिंदुत्ववादी चाहते हैं कि जिस तरह बाबरी मस्जिद गिराई गई, उसी तरह औरंगजेब की कब्र को भी ध्वस्त कर देंगे.
सामना के लेख में आगे कहा गया है कि ये लोग इतिहास और महाराष्ट्र की शौर्य परंपरा के दुश्मन हैं. वे महाराष्ट्र के वातावरण में विष फैलाना चाहते हैं. खुद को हिंदू-तालिबानी के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं. हिंदुत्व का विकृतीकरण कर ये लोग शिवराय के हिंदवी स्वराज्य का भी अपमान कर रहे हैं. ऐसे लोगों को यह सोचने की जरूरत है कि छत्रपति शिवाजी महाराज किसके खिलाफ लड़े?
सामना के लेख में यह पूछा है कि मराठों ने 25 साल तक दुश्मनों को कैसे उलझाए रखा? महाराष्ट्र के स्वाभिमान पर चोट करने वालों की कब्रें इसी मिट्टी में कैसे बनी हैं? यह इतिहास कुछ लोग मिटाना चाहते हैं. छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर चल रहे इस गंदे धंधे को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बंद करना चाहिए!
शिवाजी महाराज ने दी मराठा इतिहास को नई दिशा
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर सामना ने अपने लेख में बताया है कि उनकी वजह से इतिहास के प्रवाह को एक नई दिशा मिली. छत्रपति शिवाजी महाराज की मुंबई में पहली प्रतिमा का अनावरण करते समय 26 जनवरी 1961 को यशवंतराव चव्हाण ने कहा था कि अगर छत्रपती शिवाजी महाराज नहीं होते तो भारत का क्या होता, यह पूरी दुनिया जानती है. इसका जवाब देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान की सीमा ढूंढ़ने के लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. शायद वह आपके और मेरे घर तक भी पहुंच जाती.
यशवंतराव के कहने का मतलब था कि अगर शिवाजी महाराज नहीं होते तो भारत के और भी बड़े हिस्से पर, शायद आपके और मेरे घर तक भी मुसलमानों की भारी आबादी होती और उस भूभाग पर भी पाकिस्तान ने दावा किया होता, यह सच है.
इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा था, `शिवराय का रूप याद करो, शिवराय का प्रताप याद करो’ जब रामदास ने शंभू राजा को यह लिखा था, तब उनकी नजर के सामने उस तेजस्वी राजा की धीर-गंभीर मुद्रा ही रही होगी. शिवराय का नाम लेते ही हर मराठी व्यक्ति का मन गर्व से भर जाता है. मान-अभिमान से ऊंचा हो जाता है और आदर से झुक जाता है. शौर्य और सहनशीलता, त्याग और तेज, उदारता और सत्यनिष्ठा जैसे कई गुणों से भरा हुआ वह महान जीवन. मराठी जीवन के साथ, महाराष्ट्र की मिट्टी के साथ, देश के भाग्य के साथ इतना एकरूप होने वाला छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा दूसरा व्यक्तित्व नहीं होगा. छत्रपती महाराष्ट्र में जन्मे यह महाराष्ट्र का सौभाग्य है.
'इतिहास को समझें नव हिंदूवादी'
छत्रपति शिवाजी महाराज ने तलवार के बल पर `स्वराज्य’ बनाया और जो उनकी तलवार से टकराया उसे इसी मिट्टी में दफन कर दिया. उनमें से एक बादशाह औरंगजेब भी था. औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र की अस्मिता और जुझारू पराक्रम का स्मारक है. इस `कब्र’ को हटाओ नहीं तो हम इसे नष्ट कर देंगे, ऐसा रुख बीजेपी या संघ से जुड़े कुछ उन्मादी धर्मांधों ने लिया है. उन्हें इतिहास को समझना चाहिए.
औरंगजेब महाराष्ट्र को जीत नहीं पाया- सामना
मराठों ने औरंगजेब को 24 साल तक लड़ाई में उलझाए रखा. औरंगजेब थक गया, हताश हो गया और पराजित मन से उसने प्राण त्याग दिए. औरंगजेब महाराष्ट्र को जीत नहीं पाया. अफजल खान भी शिवराय से घात करने में सफल नहीं हो पाया. कटी हुई उंगलियां लाल महल में फेंककर शाइस्ता खान भाग गया. औरंगजेब और अफजल खान की कब्रें महाराष्ट्र में ही हैं. शौर्य के उन स्मारकों को उसी तरह से देखना चाहिए.