Maharashtra News: हाल ही में एनसीपी शरद चंद्र पवार की पार्टी की सालगिरह का जश्न अहमदनगर में आयोजित किया गया था. इस समारोह में मंच पर बैठे नेताओं ने एक-दूसरे की आलोचना की. इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि पार्टी में अंदरूनी कलह है. आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का यह अंतर्कलह शरद पवार (Sharad Pawar) के लिए सिरदर्द बन सकता है क्योंकि रोहित पवार ने बिना नाम लिए सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल (Jyant Patil) और महिला प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खडसे की आलोचना की. इसके बाद राज्य में पार्टी के अंदर चल रहे अंतर्कलह को लेकर चर्चा शुरू हो गई.


एबीपी माझा की रिपोर्ट के मुताबिक रोहित पवार समर्थक और जयंत पाटिल समर्थक भी सोशल मीडिया पर भिड़ गए. रोहित पवार का यह व्यवहार निश्चित रूप से नया नहीं था क्योंकि लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद रावेर सीट से रोहित पवार ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इस बात पर अफसोस जाहिर किया था कि हमारी ही पार्टी के लोगों ने रोहिणी खडसे को तवज्जो देकर काम नहीं किया. श्रीराम पाटिल ने रावेर निर्वाचन क्षेत्र में अच्छी टक्कर दी. हालांकि, वे सफल नहीं हुए क्योंकि उन्हें संगठन से आवश्यक ताकत नहीं मिली.


पाटिल गुट का रोहित पवार पर निशाना
साथ ही रोहित पवार ने कहा था कि इस विधानसभा क्षेत्र में पदाधिकारियों ने अपना काम नहीं किया है. तो वहीं, जयंत पाटिल को लेकर रोहित पवार के करीबी कार्यकर्ताओं ने भी पोस्ट कर उन्हें बदलने की मांग की है. वहीं, जयंत पाटिल के करीबी भूषण राउत ने बिना नाम लिए रोहित पवार पर सीधा निशाना साधा. राउत ने ट्वीट किया है कि 'राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहना मुर्गियां पालने जितना आसान नहीं है.' इससे ऐसा लगता है कि राउत का ट्वीट सीधे तौर पर रोहित पवार पर लक्षित है क्योंकि रोहित पवार के पास बारामती एग्रो के जरिए एक बड़ी पोल्ट्री इंडस्ट्री भी है. लिहाजा, एनसीपी में शीत युद्ध एक बार फिर सामने आ गया है.


जयंत पाटिल के फैसले से रोहित पवार नाराज
कार्यकर्ता लगातार मांग कर रहे थे कि रोहित पवार और रोहित पाटिल को पार्टी संगठन में जिम्मेदारी दी जाए. साथ ही खुद शरद पवार ने भी रोहित पवार और रोहित पाटिल को जिम्मेदारी देने की बात जयंत पाटिल से कही थी. हालांकि, पता चला है कि जयंत पाटिल के ऐसा करने से इनकार करने से रोहित पवार नाराज हैं.


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