पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है. पंजाब में एक चरण में 14 फरवरी को वोटिंग होगी और 10 मार्च को नतीजे घोषित होंगे. इस चुनाव में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और आम आदमी पार्टी मैदान में हैं. आपको बताते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में किस पार्टी ने कितनी सीटें जीती थीं.

77 सीटें जीतकर कांग्रेस ने बनाई थी सरकार

  • पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं. साल 2017 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 77 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी.
  • साल 2017 के विधानसभा चुनाव में 78.6 प्रतिशत मतदान हुआ था.
  • इस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन शिअद और बीजेपी को केवल 18 सीटों पर ही जीत मिली थी. जिसमें से शिअद के खाते में 15 सीट और बीजेपी के खाते में केवल 3 सीटें आई थीं.
  • इस तरह 10 सालों से सत्ता में रहने वाली शिअद और बीजेपी का किला ध्वस्त हो गया. 2017 चुनाव में आम आदमी पार्टी को 117 में से 20 सीटों पर जीत मिली थी. इसके अलावा लोक इंसाफ पार्टी भी 2 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी. 

बीजेपी का वोट शेयर था केवल 5.4 फीसद

  • अगर वोट शेयर की बात करें तो कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 38.5 प्रतिशत था.
  • आम आदमी पार्टी का 23.7 प्रतिशत वोट शेयर, शिअद का 25.7 प्रतिशत वोट शेयर और बीजेपी का वोट शेयर 5.4 प्रतिशत था.
  • 2017 के चुनाव में  कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला सीट से 51 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी वहीं पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल लांबी सीट से 22 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. अमृतसर ईस्ट से नवजोत सिंह सिद्धू ने बीजेपी नेता राजेश कुमार को 42 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. 

आपको बता दें कि इस साल होने वाले चुनाव में ये देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब के वोटर्स किसे वोट देते हैं. क्या एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में आएगी या कोई और पार्टी. पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में पंजाब इकलौता ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी की सरकार है जबकि बाकी चार राज्यों में बीजेपी सरकार में है.

  • पाकिस्तान से सटे होने के कारण पंजाब सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए अहम हो जाता है. बीजेपी के लिए इस बार पंजाब जीतना आसान नहीं होगा. क्योंकि कृषि कानून के कारण उसकी सहयोगी पार्टी शिअद अब गठबंधन से अलग हो चुकी है वही पंजाब के किसान बीजेपी से नाराज चल रहे हैं. हालांकि कांग्रेस के लिए भी राह आसान नहीं है. दरअसल पार्टी के भीतर गुटबाजी के कारण पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमिंदर सिंह पार्टी से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई है. खबरों के मुताबिक चुनाव से पहले वे बीजेपी के साथ गठबंधन कर सकते हैं.  

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