अजमेर शरीफ दरगाह में इफ्तार, भारतीय धर्म संसद के अध्यक्ष सुशील गोस्वामी बोले, 'हमारा DNA एक है'
Ramazan 2025: रमजान का महीना समाप्ति पर है और ईद की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस बीच अजमेर शरीफ में बुधवार को इफ्तार के मौके पर हिंदू समाज के लोग भी पहुंचे.

Ajmer Sharif News: अजमेर शरीफ दरगाह में जब बुधवार शाम को इफ्तार का आयोजन किया गया तो यहां हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की अनोखी मिसाल देखने को मिली. यहां केवल मुस्लिम रोजा नहीं रखते बल्कि अजमेर में कुछ हिंदू परिवार भी रोज रखते हैं. यहां तक बुधवार को हिंदू संत भी यहां पहुंचे और रोजा खोला.
चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ''25वें रमजान पर सर्व धर्म इफ्तार का आयोजन किया गया, भारतीय धर्म संसद के अध्यक्ष सुशील गोस्वामी भी पहुंचे. वे गरीब नवाज आए और हमारे शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. मोहब्बत सबसे और नफरत किसी से नहीं, यही संदेश है. गरीब नवाज में जो दुआ की गई है वह कुबूल हो. हम देशवासियों के लिए दुआ करते हैं. जिस तरह यहां लोग अमन, चैन और प्यार से रहते हैं वैसे ही लोग कोने-कोने में ऐसे रहें.''
हम प्यार का पैगाम दे रहे हैं- सुशील गोस्वामी
वहीं, सुशील गोस्वामी ने कहा, ''मुझे यहां पुष्कर के रास्ते आने का मौका मिला. वही एक रास्ता है जो भारत को एक कर सकता है. अनेकता में एकता को साबित कर सकता है. सलमान चिश्ती जी के अनुरोध पर आया. रोजा खोलने के वक्त पहली बार आया, वैसे हमेशा आता हूं. बाहर के सनातनी संत हैं सात समुद्र से पार भी आए हैं. सर्व धर्म संसद, सलमान जी, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब मिलकर भारत के प्यार का पैगाम दे रहे हैं. पीएम मोदी ने जो पहल की है उससे साबित होता है कि मतभेद नहीं है. मैं ऐसा नहीं मानता कि भारत सरकार काम नहीं कर रही है. सबका साथ सबका विश्वास का काम है, वही भारत की संस्कृति है.''
हमारी संस्कृति और तहजीब एक है- सुशील गोस्वामी
सुशील गोस्वामी ने कहा कि जो देश का तोड़ने की बात करते हैं उसका कोई मजबह नहीं होता. वह शरारती होते हैं वह सब मजहब में है. उनपर कार्रवाई होनी चाहिए. हमारी तहजीब, संस्कृति और संस्कार एक हैं. हमारे डीएनए एक हैं.
Source: IOCL




























