Kota News: 'मेरी अर्थी को तब तक मत उठाना, जब तक इंसाफ न मिल जाए', पुलिस से तंग आकर किसान ने की आत्महत्या
Kota News: मृतक किसान के परिवार वाले न्याय की मांग करते हुए शव को लेकर जलालपुरा चौकी के सामने पहुंचे. यहां करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उनपर लाठी चार्ज कर दिया.
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Kota News: मध्य प्रदेश पुलिस की कथित प्रताड़ना से परेशान होकर कोटा के खातौली के एक किसान धर्मेंद्र पारेता ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा. सैकड़ों लोग शव को लेकर प्रदर्शन के लिए 250 किलोमीटर दूर एमपी की जलालपुरा पहुंच गए. यहां शव रखकर प्रदर्शन कर रहे थे कि तभी एमपी पुलिस ने लाठी चार्ज कर दी और आंसू गैस के गोले दागे. इधर प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर पत्थर फेंके, जिससे पुलिस की गाड़ी के शीशे टूट गए.
इससे पहले पीड़ित के परिजन और लोग न्याय की मांग को लेकर शव को एमपी पुलिस की जलालपुरा चौकी पर लेकर पहुंचे. यहां शव रखकर करीब 1 घंटे तक प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन में गांव के करीब 500 लोग शामिल थे. शाम करीब 5.00 बजे हंगामा होता देख प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग दिए. पुलिस ने भागते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाना शुरू कर दिया. इससे प्रदर्शनकारी भी अपना आपा खो बैठे और पुलिस पर पथराव कर दिया.
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थानाधिकारी समेत 5 सस्पेंड
लाठी चार्ज में महिलाएं और बच्चे भी चोटिल हुए हैं. मौके पर श्योपुर के स्थानीय विधायक बाबूलाल झड़ेल भी पहुंचे. उनकी भी पुलिस से बहस हुई. मामला मध्यप्रदेश के श्योपुर देहात थाना इलाके के जलालपुरा चौकी का है. सुसाइड से पहले किसान ने सोशल मीडिया पर लिखा है- 'मेरी अर्थी को तब तक मत उठाना, जब तक इंसाफ नहीं मिल जाए. दारू का केस झूठा है.' बताया जा रहा है कि इस दौरान थानाधिकारी सहित 5 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है.
250 किलोमीटर दूर शव को लेकर किया प्रदर्शन
किसान धर्मेंद्र पारेता ने मंगलवार दोपहर बाद एक खेत में कीटनाशक दवा पी ली थी. इस दौरान किसी ने बेहोशी की हालत में मुंह से झाग निकलते देखा. धर्मेंद्र के मोबाइल से ही परिजनों को कॉल कर जानकारी दी. इसके बाद अस्पताल में इलाज के शाम 6.30 बजे दौरान मौत हो गई. बुधवार सुबह करीब 10 बजे पोस्टमार्टम हुआ. मृतक के परिजन गांव से लोगों को एकत्रित कर प्रदर्शन के लिए 250 किलोमीटर दूर एमपी की जलालपुरा पहुंच गए.
मृतक के बेटे दीपक पारेता (20) ने बताया कि उसके पिता धर्मेंद्र पारेता (45) 25 अक्टूबर को अपने दोस्त ओमप्रकाश, नरेश बंसल, विकास के साथ दोपहर 1.00 बजे करीब खातौली से जलालपुरा ताश पत्ती खेलने गए थे. दोपहर 2.30 से 3 बजे के बीच स्थानीय पुलिस ने खेत में छापा मारा. इस दौरान पुलिस ने 3 लोगों को पकड़ा. इनमें जलालपुरा के मिथुन और रामकरण और खातौली से उसके पिता के साथ गया ओम प्रकाश शामिल थे. ओम प्रकाश ताश भी नहीं खेल रहा था. वह हमारी कार के पास खड़ा था. बाकी सब लोग मौके से भाग गए थे. पुलिस ने हमारी गाड़ी जब्त कर ली. दीपक ने बताया कि उसके पिता ने गांव आकर गाड़ी पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात बताई. उसी दिन शाम को दीपक अपने मिलने वाले के साथ जलालपुरा चौकी पहुंचा. गाड़ी छुड़ाने की प्रोसेस के बारे में जानकारी ली. दीपक का आरोप है कि इस दौरान वहां पर मौजूद एसआई श्यामवीर यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने गाड़ी नहीं छोड़ने की बात कही. साथ ही श्यामवीर ने 20 हजार रुपए मांगे.
आरोप: पुलिस ने शराब का झूठा केस लगाया, छोड़ने पर 2 लाख मांगे
दीपक का आरोप है कि श्यामवीर ने कहा कि रुपए देने पर ही गाड़ी छूटेगी. दीपक ने कहा कि इतने रुपए नहीं हैं. तब पुलिसकर्मियों ने उसे धमकी दी की गांजे या शराब के केस में फंसा देंगे. दीपक ने आरोप लगाया कि 26 अक्टूबर को सुबह पुलिस ने शराब का झूठा केस बना दिया. कार से 7 पेटी शराब पकड़ना बताया. जब यह बात घर वालों को पता लगी तो वापस पुलिस के पास पहुंचे. केस के बारे में कहने पर श्यामवीर ने 2 लाख की मांगे. श्यामवीर ने कहा अगर यह रकम दे दी तो गाड़ी छुड़वा देंगे. एक दिन में ही ओम प्रकाश को भी जमानत दिलवा देंगे. इतने रुपए की व्यवस्था नहीं होने की बात कहने पर उन्हें वहां से फटकार कर भगा दिया गया. बेटे दीपक पारेता ने बताया कि बार-बार पुलिस वाले पैसा मांग रहे थे, लेकिन व्यवस्था नहीं हो रही थी. इसलिए झूठा केस लगा दिया.
पहले नस काटी और फिर जहर खाया
केस के बाद से ही उसके पिता धर्मेंद्र परेशान थे. 29 अक्टूबर को उन्होंने हाथ की नसें काटकर आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन घरवालों को समय रहते पता लग गया. ऐसे में खातौली में ही उसका उपचार करवाया गया. इसके बाद मंगलवार को धर्मेंद्र ने जहर खा लिया। धर्मेंद्र कार चलाने का काम करता था. पुलिस केस से धर्मेंद्र इतना परेशान था कि उसने अपनी बेटी को मैसेज कर कहा, कोमल पुलिस वालों ने मुझ पर झूठा केस लगा दिया. यही बात उसने अपनी वॉट्सएप स्टोरी में भी लिखी थी. साथ ही सोशल मीडिया पर लिखा- मेरी अर्थी को तब तक मत उठाना. जब तक इंसाफ नहीं मिल जाए. दारू का केस झूठा है.
समाज के लोगों ने सड़क पर शव रखकर जाम किया रास्ता
परिजनों की मांग है कि परेशान करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए. एमपी पुलिस के खिलाफ कर रहे हैं जांच खातौली निवासी धर्मेंद्र पारेता ने मंगलवार को गैंता रोड़ आनासार के पास शराब के साथ किसी विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था, जिसकी कोटा में उपचार के दौरान मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने मामले में इटावा थाने में रिपोर्ट सोंपी है, जिस पर मामला दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच की जा रही है. इधर मृतक के परिजनों तथा कलाल समाज के लोगों ने मृतक के शव को सड़क पर रखकर एमपी राज्य की सीमा में सड़क को जाम कर दिया.
धनराज मीणा, थानाधिकारी इटावा ने बताया कि परिजन एमपी के सम्बंधित थाने के पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने, मृतक के सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा मुआवजा दिए जाने की मांग पर अड़े हैं. वहीं, इस दौरान एमपी की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग करके हटाने का प्रयास किया.
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