Rajasthan News: चीतों के लिए हिरण की बलि देने पर बिश्नोई समाज आहत, पीएम मोदी को पत्र लिख रखी ये मांग
नामीबिया से लाए गए चीतों के लिए चीतल और हिरण की बलि देने पर बिश्नोई समाज ने नाराजगी जताई है. इस संबंध में पीएम मोदी को पत्र भेजा है.
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Bishnoi Community Angry: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में नामीबिया से लाए 8 चीतों की भूख मिटाने के लिए राजगढ़ के जंगल से 181 चीतल श्योपुर भेजने पर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है. बिश्नोई महासभा अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में लिखा कि भारत सरकार ने अपने नेतृत्व में नामीबिया से लाकर 8 चीतों को हिंदुस्तान के वनों में विलुप्त प्रजाति को पुनर्स्थापित करने के लिए छोड़ा है. उनको भोजन में चीतल, हिरण इत्यादि देने से बिश्नाई समाज बहुत आहत है.
देवेंद्र बूड़िया ने पीएम को बताया कि बिश्नोई समाज अपने आराध्य गुरु जम्भेश्वर भगवान के बताए सिद्धांतों पर चलते हुए पिछली पांच शताब्दियों से पर्यावरण, प्रकृति और वन्य जीवों की रक्षा कर रहा है. यह विश्व का एकमात्र ऐसा समाज है जो वृक्षों और वन्य जीवों के लिए बलिदान देता आया है. इनकी रक्षा के लिए समाज के 363 लोगों ने बलिदान दिया है.
'विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाएं'
महासभा अध्यक्ष ने बताया कि चीतों के लिए चीतल परोसे जाने की खबर से पूरा बिश्नोई समाज दुखी है. समाज की सभी संस्थाएं, साधु, संत, जीव रक्षा समिति, जीव रक्षा सभा और महासभा आहत है. वैज्ञानिक दृष्टि से यह कोई स्थापित तथ्य नहीं है कि चीता प्रकृति के लिए परिहार्य है और चीतल नहीं. उन्होंने बताया कि राजस्थान में हिरणों की प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है. इन्हें बचाने के लिए बिश्नोई समाज जीवों की रक्षार्थ प्राणों की आहुति देता आया है.
पीएम से फैसला वापस लेने की मांग
समाज ने प्रधानमंत्री पीएम से मांग की है कि राजस्थान में विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाया जाए. समाज की भावनाओं और गुरु जम्भेश्वर भगवान के जीव दया सिद्धांत का सम्मान करते हुए चीतों के लिए चीतल परोसने के फैसले पर पुनर्विचार कर अवैधानिक और संवेदनहीन आदेश को निरस्त किया जाए. पीएम मोदी को भेजे पत्र की प्रति वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को भी भेजी है.
पहले भी भेजे थे 245 चीतल
नरसिंहगढ़ वन परिक्षेत्र के अधिकारी गौरव गुप्ता के मुताबिक, राजगढ़ वन मंडल में स्थित नरसिंहगढ़ चिडिखो अभ्यारण से 181 चीतल कूनो नेशनल पार्क में भेजे गए हैं. इसके अलावा 245 चीतल गांधी सागर अभ्यारण में वर्ष 2021 में भेजे गए थे. 9 चीतल देवास के सिवनी में भेजे गए हैं.
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