Rajasthan: मंत्री रामलाल जाट को हनीट्रैप करने की कोशिश के मामले में आरोपी को मिली जमानत
Rajasthan Honeytrap: राजस्थान सरकार के मंत्री रामलाल जाट को हनी ट्रैप करने के प्रयास के मामले में आरोपी अक्षत शर्मा और दीपाली को कोर्ट से जमानत मिल गई है. पुलिस ने अब इस एक्ट के तहत केस दर्ज किया है.
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Rajasthan News: राजस्थान सरकार के मंत्री रामलाल जाट को हनी ट्रैप करने के प्रयास के बहुचर्चित मामले में आरोपी अक्षत शर्मा और दीपाली की कोर्ट से जमानत मिल गई है. इसके बाद जोधपुर पुलिस ने अपनी गलती मान ली है. जिसके कारण आरोपी को जमानत मिली है. पुलिस ने दीपाली और अक्षत शर्मा के विरुद्ध अब साइबर एक्ट का पॉर्न वीडियो सप्लाई का एक नया मामला दर्ज किया है. इस मामले को लेकर आरोपियों की तलाश जारी है.
जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट पूर्व के डीसीपी ने मीडिया को दी जानकारी
जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट पूर्व के डीसीपी भुवन भूषण यादव ने आज मीडिया से बात करते हुए बताया कि अक्षत शर्मा और दीपावली के साथ कई लोग जुड़े हुए थे. मंत्री से अधिवक्ता नवीन तिवारी की पार्टी की 399 बीघा जमीन जोकि जयपुर के पास स्थित थी. उस को सरकार के द्वारा जैसलमेर के पास अलॉट कर दिया था. उस जमीन को दूसरी जगह अलॉट करवाने के लिए अक्षत शर्मा और दीपाली के साथ अन्य लोगों ने मिलकर मंत्री रामलाल जाट को हनीट्रप में फंसाने की कोशिश की. अक्षत शर्मा और दीपाली के द्वारा गुनगुन को ₹35000 देकर भीलवाड़ा के सर्किट हाउस में मंत्री जी के पास भेजा गया था. काम नहीं होने पर गुनगुन उपाध्याय से रुपए वापस लिए गए.
वहीं गुनगुन उपाध्याय के बारे में बताया कि गुनगुन ने अपने घर वालों को कहा था कि मुझे प्रतिदिन ₹5000 मिलते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं था कि गुनगुन ने अपने परिवार वालों से झूठ बोला था. कुछ लोगों से रुपए उधार लिए हुए थे. नवंबर से जनवरी तक गुनगुन की तबीयत भी खराब रही थी. आर्थिक स्थिति और दबाव के चलते गुनगुन ने जोधपुर के होटल लॉर्ड की छत से जान देने के लिए छलांग लगाई. गुनगुन का अस्पताल में इलाज चल रहा है.
पुलिस ने गुनगुन आत्महत्या प्रयास मामले में दर्ज किया है केस
पुलिस ने गुनगुन आत्महत्या प्रयास मामले में धारा 506, 384, 354c, 667 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है. इस मामले में हमारे जांच अधिकारी की गलती रही कि आरोपियों को उदयपुर से गिरफ्तार करने के दौरान 41a का नोटिस नहीं दिया गया. इसी को आधार बनाकर अक्षत शर्मा और दीपाली के अधिवक्ता ने अदालत से आरोपियों को जमानत मिल गई. इस तरह के हाई प्रोफाइल मामले में जो गलती हुई है उसकी जांच एसीपी मंडोर राजेंद्र दिवाकर के द्वारा की जा रही है.
इस वजह से मिली जमानत
विधि विशेषज्ञ संदीप जैन ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 को शामिल नहीं किया था. इस मामले में अगर पुलिस इस धारा को लगाती तो इन आरोपियों को जमानत नहीं मिलती. आखिर पुलिस किसको बचाना चाहती है और क्यों यह सवाल अभी भी बना हुआ है.
क्या है आईपीसी की धारा 306?
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के मुताबिक अगर कोई शख्स किसी को भी सुसाइड यानी आत्महत्या के लिए उकसाता है, उसे प्रेरित करता है और वह आत्महत्या कर लेता है तो उकसाने या प्रेरित करने वाले को आरोपी माना जाएगा.
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