Rajasthan News: एनजीटी ने राजस्थान सरकार पर लगाया 3,055 करोड़ रुपए का जुर्माना, कहा- नुकसान रोकना जरूरी
Rajasthan में कचरा प्रबंधन में खराबी के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ हैं. जिसको लेकर अब एनजीटी ने राजस्थान सरकार को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए 3055 करोड़ रुपए जमा कराने के आदेश दिए हैं.
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Rajasthan News: राजस्थान (Rajasthan) में कचरा प्रबंधन में खराबी के कारण पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा हैं. इसको लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने अब सख्त कदम उठाते हुए कचरा प्रबंधन अव्यवस्था के चलते निर्देशित किया हैं. राजस्थान सरकार को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए 3055 करोड़ रुपए जमा कराने के आदेश दिए हैं. ये क्षतिपूर्ति ठोस और गीले कचरे के अव्यवस्थित प्रबंधन के लिए जुर्माना है. इस संबंध में गुरुवार को आदेश देने वाली बेंच के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल के अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस सुधीर अग्रवाल व विशेषज्ञ प्रो. सैंथिल वेल शामिल थे.
पर्यावरण के नुकसान को रोकने के लिए लिया फैसला
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल के अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एनजीटी एक्ट के सेक्शन 15 के तहत कचरा प्रबंधन अव्यवस्था के कारण पर्यावरण को लगातार नुकसान के निदान के लिए ये क्षतिपूर्ति लगाना जरूरी था. एनजीटी के अनुसार केवल आदेश जारी किए गए, सिर्फ खानापूर्ति हुई. रेस्टोरेशन के दायित्व तक तय नहीं हुए. बीते 8 सालों में कोई भौतिक बदलाव जमीन पर नहीं दिखा, जबकि ये बेहद जरूरी था. बता दें, एनजीटी ने अन्य राज्यों के लिए भी ऐसे फैसले दिए हैं.
योजना के अनुसार नहीं हुआ काम, तो लगेगा जुर्माना
एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि क्षतिपूर्ति राशि मुख्य सचिव (सीएस) के निर्देश पर पर्यावरण सुधार पर खर्च होगी. इसमें सीवरेज प्रबंधन व ट्रीटमेंट, अपग्रेडेशन और उपयोग सुनिश्चित करना शामिल है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी मानकों के अनुरूप कचरा प्रबंधन होना चाहिए. मिश्रित एवं जैविक ठोस कचरे का निस्तारण योजना अनुरूप समय से नहीं किया गया तो अतिरिक्त जुर्माना लगेगा. पिछले सप्ताह महाराष्ट्र सरकार पर भी एनजीटी ने जुर्माना लगाया था.
जानिए गीले और ठोस कचरे के लिए कितनी राशि तय हुई
बता दें कि आदेश सुप्रीम कोर्ट के अलमित्र एच पटेल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व पर्यावरण सुरक्षा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामलों में दिए निर्देश के तहत पारित किया गया. इसमें ट्रिब्यूनल को ठोस और गीले कचने के प्रबंधन की निगरानी की आवश्यकता बताई गई थी. एनजीटी ने गीले कचरे के लिए 2500 करोड़ और ठोस कचरे के लिए 555 करोड़ रुपए तय किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में देश के सभी राज्यों में प्रदूषण मंडल के अध्यक्ष का पद पर्यावरण विशेषज्ञों के रूप नियुक्त करने के लिए कहा था. राजस्थान सरकार ने इसकी विज्ञप्ति भी जारी की थी, लेकिन एक साल से उस पद पर नियुक्ति नहीं की. इस पर राजस्थान सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस भी चल रहा है.
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