World Asthma Day 2023: राजस्थान में बदलते मौसम की वजह से बढ रहे हैं मरीज, इन शहरों में बढ़ा है इसका खतरा
Asthma in Rajasthan: अस्थमा भवन की डॉक्टर निष्ठा सिंह बताती हैं कि इन्हेलेशन थेरेपी अस्थमा के प्रबंधन की मुख्य बुनियाद है. लेकिन इनहेलर से संबंधित सामाजिक कलंक ने इसके कुप्रबंधन को और बढ़ा दिया है.
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Jaipur News: आज विश्व अस्थमा दिवस है.ऐसे में हर जगह अस्थमा से बचाव के तरीके और उपाय बताए जाएंगे.राजस्थान में अस्थमा के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. क्योंकि,यहां पर मौसम में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है.गर्मी के दिनों में प्रदूषण का लेवल थोड़ा कम रहता है, लेकिन यहां पर अब मौसम पूरा बदल गया है.पिछली ठंड में राजस्थान में अस्थमा के मरीजों में खूब वृद्धि हुई है.वायु प्रदूषण तेजी से जयपुर,उदयपुर और अजमेर में बढ़ा है. अस्थमा के रोगियों के लिए जागरूकता एक बड़ा बचाव माना जाता है.जयपुर में इसकी शुरुआत अस्थमा भवन की कार्यकारी निदेशक डॉ निष्ठा सिंह ने की है. ठंड के महीनों में विधिवत इसके लिए कई प्रयोग भी किए जाते हैं.
अस्थमा के लिए करना होगा काम
डॉक्टर निष्ठा सिंह बताती हैं कि हालांकि,इन्हेलेशन थेरेपी अस्थमा के प्रबंधन की मुख्य बुनियाद है.फिर भी इनहेलर से संबंधित सामाजिक कलंक ने इस रोग के कुप्रबंधन को और बढ़ा दिया है.यह विशेष रूप से बच्चों में मामले में ज्यादा प्रबल है, जहां पेरेंट्स अक्सर रोग को छिपा जाते हैं. इस प्रकार जब तक लक्षण बिगड़ नहीं जाते तब तक उपचार से बचते या इसे टालते रहते हैं.असल में डॉक्टर द्वारा डायग्नोस किए गए रोगियों में इन्हेलेशन थेरेपी का प्रयोग 9 फीसदी से भी कम है.उपचार का खर्च,स्वास्थ्य सेवा की खराब सुलभता और अपर्याप्त संसाधनों तथा चेतावनी के संकेत की पहचान में मदद के लिए उचित मार्गदर्शन तथा उचित उपकरण तकनीक की कमी के कारण ये मौजूदा चुनौतियां और ज्यादा बड़ी हो रही हैं.भारत में इन चुनौतियों से निपटने के लिए दमा और इसके अनुशंसित उपचारों दोनों के लिए भारत के नजरिए में महत्वपूर्ण बदलाव आवश्यक है.
क्या कहना है विशेषज्ञों का
डॉक्टर निष्ठा सिंह का कहना है कि रोगियों को पर्याप्त सशक्तिकरण और लगातार समर्थन प्रदान करने से दमा को लेकर नजरिए और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ सकता है.जब जागरूकता के प्रयासों को एक ऐसे इकोसिस्टम द्वारा पर्याप्त रूप से सहयोग दिया जाए जो सिप्ला के ब्रीद फ्री प्रोग्राम जैसे हेल्थकेयर सपोर्ट की बेहतर सुलभता को आसान बनाता है.जांच,परामर्श और उपचार के पालन के क्षेत्रों में रोगी की पूरी यात्रा को शामिल करने वाले इस तरह के कार्यक्रम रोगियों को अपने फेफड़े की सेहत बेहतर रूप से संभालने में मदद के लिए महत्वपूर्ण हैं.
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