आगरा: कोरोना के चलते तीर्थ बटेश्वर में लगने वाला सैकड़ों साल पुराना उत्तर भारत का प्रसिद्ध मेला हुआ स्थगित
आगरा के लोगों को उस वक्त मायूस होना पड़ा है, जब जनपद में लगने वाला सबसे प्राचीन मेला प्रशासन ने स्थगित कर दिया. कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने ये फैसला लिया.

आगरा: आगरा जनपद के तीर्थ बटेश्वर में सैकड़ों साल पुराना उत्तर भारत का प्रसिद्ध प्राचीन मेला इस वर्ष कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया. कोविड-19 को लेकर जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया, जिस कारण क्षेत्रीय लोगों के साथ व्यापारी भी मायूस हो गए. बता दें प्रसिद्ध तीर्थ बटेश्वर मेला करीब 375 साल पुराना बताया जाता है. उत्तर भारत का श्री बटेश्वर नाथ मेला वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में उमड़ने वाली लाखों की श्रद्धालुओं की भीड़ को मध्य नजर रखते हुए जिला आगरा प्रशासन ने स्थगित करने का निर्णय लिया. सैकड़ों साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि मेला इस बार नहीं लगाया जा रहा है. साथ ही श्री बटेश्वर नाथ ब्रह्म लाल महाराज के मंदिर के पट अभी तक नहीं खुले हैं. श्रद्धालु गेट के बाहर से ही पूजा करके लौट जाते हैं, जिस कारण भक्तों के साथ स्थानीय पुजारी और संतों में भी मायूसी है.
एक महीने तक चलता है मेला
जिला पंचायत आगरा द्वारा श्री बटेश्वर नाथ मेला एक माह तक आयोजित होता है. प्रथम चरण का बैल, गाय, एवं दूसरे चरण का घोड़े, ऊंट ,गधे ,खच्चर आदि पशुओं की बिक्री व्यापारियों किसानों द्वारा की जाती है. वहीं, तीसरे चरण का लोक मेला का आयोजन किया जाता है. जिसमें एकादशी, पूर्णिमा, द्यूज, को महामंडलेश्वर बाबा बालक दास के साथ दर्जनों की संख्या में संत करतब दिखाते हुए यमुना मैया नदी में शाही स्नान करते हैं.
मेले का इतिहास
तीर्थ बटेश्वर मेला दीपावली की रोज से कार्तिक पूर्णिमा के बाद पंचमी तक हर वर्ष मेले का आयोजन सैकड़ों सालों से होता चला आ रहा है. सन 1646 में तत्कालीन भदावर नरेश बदन सिंह ने बटेश्वर में एक कोस लंबा अर्धचंद्राकार बांध बनवाकर यमुना नदी का बहाव रोका था, इसी बांध पर भोलेनाथ शिव शंकर के 101 मंदिर श्रंखला में बनाए गए. तभी से उत्तर भारत का प्रसिद्ध श्री बटेश्वर नाथ मेला का आगाज हुआ था. प्रतिनिधि करते हुए भदावर राजघराने से प्रतिवर्ष द्यूज के दिन बटेश्वर नाथ की श्रंगार पूजा की जाती है. बटेश्वर नाथ मेले का जिक्र मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानियों में भी हैं. प्राचीन मेले में दूर निम्न राज्यों से भक्त ,श्रद्धालु, संत भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं और परिवार की सुख समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. बैकुंठ चौदस को लोग अपने पूर्वजों के लिए यमुना के घाटों पर नदी के पानी में दीपक दान करते हैं.
लगता है पशु मेला
तीर्थ बटेश्वर में लगने वाली प्रसिद्ध प्राचीन मेले में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, बिहार आदि राज्यों से व्यापारी पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए यहां पहुंचते हैं. लोक मेले में दूरदराज से दुकानदार अपनी दुकान है यहां सजाते हैं, मेले में बच्चों से लेकर महिलाओं पुरुषों सहित घरेलू हर प्रकार का सामान मिलता है, जैसे ग्रामीण साल भर के लिए एकत्रित करते हैं.
इस वर्ष जिला प्रशासन के द्वारा मेले का आयोजन स्थगित हुआ. मुख्य विकास अधिकारी आगरा जे रीभा द्वारा एक पत्र जारी किया गया, जिसमें बटेश्वर मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के मद्देनजर कोविड-19 संक्रमण को लेकर मेले की गतिविधियों को प्रारंभ ना करने का जिला प्रशासन ने निर्णय लिया. प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेले की आस लगाए बैठे व्यापारी, दुकानदार, स्थानीय ,लोग मायूस है. प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले से लोगों का जीवन यापन करने के लिए रोजगार मिलता था जो इस वर्ष नहीं मिलेगा.
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Source: IOCL






















