Almora News: उत्तराखंड(Uttarakhand) में केमू(KMU) बसों का संचालन बागेश्वर के किसी भी तहसील में नही होता है. केमू (कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन) बसों का संचाालन न होने से ग्रामीण महंगा सफर करने के लिए मजबूर हो जाते है. 55 केमू बस है. जिसमे से कोई भी बस बागेश्वर(Bageshwar) के किसी भी इलाके के लिए नहीं चलता हैै. जिससे ग्रामीणों को यात्रा करने के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. लम्बे समय से इसकी मांग उठती आ रही है. लेकिन केमु बसो का संचालन मुख्य सड़कों के अलावा ग्रामीण इलाकों या तहसील मे नही होता है. बागेश्वर मुख्यालय से बसों का संचालन केवल अल्मोडा(Almora), पिथौरागढ़(Pithauragarh), रानीखेत(Ranikhet), हलद्वानी(Haldwani) आदि स्थानों पर हो रहा है. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बसों के संचालन की मांग की जा रही है.
10 साल पहले होता था केमू बसों का संचालन
करीब 10 साल पहले केमू बसों का संचालन सभी तहसीलों में होता था. पहले सभी तहसीलों में रोस्टर वॉर बसों का संचालन किया जाता था. टैक्सियों के कारण बसों का संचालन धीरे धीरे घटने लगा है. और आज हालात यह है कि किसी भी तहसील में बसों का संचालन नही होता है. वहीं केमू स्टेशन के इंचार्ज धरणीधर जोशी के बताया कि केमु के हालात आज बेहतर नही है. 55 बसें बागेश्वर के अधीन है. सभी बाहरी क्षेत्रो में चल रही है.
ग्रामीणों ने बसों के संचालन के लिए उठाई मांग
हालांकि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए तीन जगहों पर बसों का संचालन किया जा रहा है. जिसमे गुरना, जगथाना और सनिउड़ियार तक ही बस सेवा दी जा रही है. लिंक रोड ज्यादा होने से टैक्सियां बसों के कारोबार पर ज्यादा असर डाल रही है. पहले रीमा पचार ,कपकोट, कांडा, गरुड़, कौसानी, शामा आदि तहसीलों तक काफी गाड़ियां जाती थी. लेकिन आज स्थितियां काफी बदल गयी है. आज केमू बस सेवा का स्तर लगातार गिर रहा है. नुकसान होने की वजह से अब केवल मुख्य शहरों के लिए ही गाड़ियां चलाई जा रही है. केमू के ड्राइवर क्लीनर व अन्य स्टाफ की सैलरी भी नहीं मिल पा रही है. वही स्थानीय ग्रामीणों ने लगातार सभी तहसीलों में बसों के संचालन की मांग उठाई है.
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