देहरादून: सरकार के इस फरमान के बाद ई रिक्शा चालकों पर गहराया संकट
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ई रिक्शा चालकों के लिये एक आदेश संकट बन गया है। सरकार के इस फरमान के बाद उन्हें सूझ नहीं रहा है कि वे आखिर क्या करें
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देहरादून, एबीपी गंगा। राजधानी में ई-रिक्शा चालकों पर नया नियम लागू करने से ई-रिक्शा संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। एक ओर जहां सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर 2022 तक पचास प्रतिशत ई वाहनों को सड़क पर लाने की बात कर रही है, तो वही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ई रिक्शा मुख्य सड़कों से गायब हो चुके हैं, सरकार का फरमान है कि ई रिक्शा शहर के मुख्य सड़कों पर नहीं चल सकते, वह सिर्फ गलियों में ही चल सकते हैं, साथ ही ई- रिक्शा सिर्फ रात को चलेंगे दिन में इन पर पूर्ण तरह से प्रतिबंध रहेगा। सरकार के इस फरमान के बाद अब ई-रिक्शा चालकों ने आज सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। बताते चलें कि कल राजधानी में सरकार के इस नियम के विरुद्ध ई-रिक्शा संचालक हड़ताल पर रहेंगे।
उत्तराखंड में 2022 तक सरकार द्वारा पर्यावरण को बचाने के लिए ई वाहनों में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है। सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र सिह रावत ने एक योजना के तहत लोन पर इन ई रिक्शा चालकों को ई रिक्शा भेंट किये थे पर आज सरकार के इस फरमान के बाद सैकड़ो संचालकों के सामने रोजी रोटी का संकट गहरा गया है। इसके पीछे की वजह है कि ई रिक्शा की वजह से शहर भर की सड़कों में जाम लग जाता है। ई रिक्शा चालकों का कहना है कि रात को सवारियां मिलना ना के बराबर है और ऐसे में उनको ई रिक्शे की किश्त भी जमा करने के लाले पड़ गए हैं,और समय पर किश्त जमा ना होने से बैंक के नोटिस उनको मिल रहे हैं और उनको किश्त जमा न होने की दशा में बैंक द्वारा उनके घर का सामान बेच दिया जाएगा।
मतलब साफ है कि सरकार के इस फैसले के बाद ई रिक्शा चालकों पर न केवल रोजी रोटी का संकट आ गया है बल्कि अब उन पर घर बचाने का भी संकट पैदा हो गया है। ई रिक्शा संचालकों का कहना है कि अगर सरकार को उनको चलने को बैन ही करना था तो उनका पंजीकरण ही नही करना चाहिए था। साथ ही या तो सरकार उनको चलने की परमिशन दे या फिर उनके लोन को माफ कर उनके द्वारा दी गयी राशि वापस किया जाय जिससे वह अन्य काम कर सकें।
वही मामला अब सियासी रूप भी ले चुका है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या इनकी रोजी रोटी की हो गयी है क्योंकि जब इन लोगों के ई रिक्शे दिए गए तब सरकार ने इनके लिए कोई नियम नहीं बनाया और जब तीन हजार से ज्यादा ई रिक्शे शहर में बांट दिए तो उसकी वाहवाही लूटने लगे और अचानक तुगलगी फरमान जारी कर दिया। जिससे तीन हजार लोगों की रोजी रोटी खतरे में पड़ गयी,सभी गरीब लोग हैं और सभी परेशान हैं सरकार ने इनकी रोजी रोटी छिनने का काम किया है। कल इस मामले में राज्य परिवहन विभाग से बात की जायगी और इनकी समस्या को उनके समक्ष रखा जाएगा।
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