यूपी के गाजियाबाद में 2,292 फ्लैट्स पर चलेगा बुलडोजर! GDA ने इस वजह से लिया बड़ा फैसला
गाजियाबाद में जीडीए ने कवायद तेज कर दी है. जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने तुलसी निकेतन योजना का निरीक्षण किया और साथ ही वहां के लोगों की समस्याओं को सुना और समझा.

Ghaziabad News: दिल्ली से गाजियाबाद आते समय जिले के शो विंडो तुलसी निकेतन योजना के जर्जर और गिरने लायक फ्लैट को अब बहुमंजिला इमारतों में बदलने की योजना बनाई जा रही है. यह निर्णय जीडीए बोर्ड बैठक में लिया गया है. नए सिरे से बनाने से पहले प्राधिकरण के अधिकारियों ने मौके पर पहुच कर जांचे हालात. इन फ्लैटों में रहने वाले लोग नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर है. फ्लैट तो जर्जर है उसके अलावा हल्की सी बरसात में भी कई फुट पानी जमा हो जाता है. साथ ही लोगों का आरोप है कि पीने का पानी भी बेहद गंदा आता है. इस कॉलोनी को साल 1990 में बसाया गया था.
तुलसी निकेतन योजना को नए सिरे से बनाने के लिए जीडीए ने कवायद तेज कर दी है. इसको लेकर जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने तुलसी निकेतन योजना का निरीक्षण किया और साथ ही वहां के लोगों की समस्याओं को सुना और समझा. इस योजना में जर्जर भवनों को तोड़कर नए सिरे से बहुमंजिला आवास बनाया जाएगा. जीडीए इसे पीपीपी मोड पर निजी विकासकर्ता से बनवाने की योजना बना रहा है. ये कुल 16 एकड़ में बसाई गयी थी कालोनी. जीडीए वीसी ने बताया कि तुलसी निकेतन योजना की स्थापना जीडीए ने वर्ष 1989-90 में की थी. जिसमें 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी मकान शामिल थे. कुल मिलाकर 2292 मकानों के साथ-साथ 60 दुकानें भी यहा हैं.
यहां के मकानों की हालत जजर्र
यहां 20 हजार से अधिक लोग रहते हैं. दीवारों का प्लास्टर लगातार गिरने की घटनाएं हो रही हैं. जिससे कई लोग घायल हो चुके हैं. इन घटनाओं के मद्देनजर जीडीए ने सर्वे कराया था जिसमें इन मकानों को रहने के लिए असुरक्षित बताया गया.
यहां रह रहे लोगों का कहना है कि यहां पानी की टंकी तो है लेकिन टंकी की क्या हालत है ऐसी है कि किसी भी दिन कोई अनहोनी हो सकती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बारिश के समय काफी परेशानी होती है जल भराव की समस्या के कारण इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर रह रहे लोगों को बारिश के पानी भर जाने की वजह से खास समस्या होती है.
उन्होंने बताया कि जो लोग मकान खरीद लेते हैं वह किराए पर चढ़कर चले जाते हैं मकान की मरम्मत का बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते यहां मकान बुरी हालत में है कब कोई हादसा हो जाए इसका पता नहीं.
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