अखिलेश यादव की पोस्ट सपा और कांग्रेस का भविष्य! BJP विधायक ने बताया क्या है सच?
UP Politics: बीजेपी विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि उसके बाद वाई और जेड आता है. वाई अक्षर सपा के लिए 27 का विधानसभा चुनाव है और जेड 2029 का लोकसभा चुनाव है. एक्स के बाद Z और Y आने में समय नहीं लगेगा.

UP News: पहले औरंगजेब फिर राणा सांगा के साथ अखिलेश यादव का योगी सरकार के आठ साल पूरे होने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया गया. अब यूपी में सियासी भूचाल ले आया है, बीजेपी ने अखिलेश यादव के इस पोस्ट पर हमलावर है तो वहीं कानपुर से बीजेपी विधायक इस सियासी घमासान को अंग्रेजी की वर्णमाला से जोड़ कर सपा और समूचे विपक्ष पर हमला करते नजर आए.
अखिलेश ने एक्स पर पोस्ट कर योगी सरकार के आठ सालों के काम को दो लाईन में तंज के रूप में सार्वजनिक कर दिया. अखिलेश ने लिखा, "8 साल यूपी बर्बाद और सवाल ही सवाल." योगी सरकार के आठ साल पूरे करने के बाद सीएम योगी के अपनी सरकार के रिपोर्ट कार्ड पेश किया है. लेकिन कानपुर से बीजेपी के विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने एक्स की पोस्ट को सपा समेत पूरे विपक्ष की समाप्ति का संकेत दे दिया.
अंग्रेजी की वर्णमाला में 26 अक्षर की तुलना बीजेपी विधायक ने समूचे विपक्ष से कर दी. विधायक मैथानी ने कहा कि विपक्ष के पास अब कुछ नहीं है. वो और उनके नेता बस इतिहास के पन्नों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं. विपक्ष के साथ सपा भी A से शुरू होकर X पर आ पहुंची है और उल्टे सीधे पोस्ट कर रही है. लेकिन सपा को शायद नहीं मालूम है कि उनका अंत नजदीक है क्योंकि अब वो एक्स पर उतर आए हैं.
क्या बोले बीजेपी विधायक
विधायक ने कहा कि उसके बाद वाई और जेड आता है. वाई अक्षर सपा के लिए 27 का विधानसभा चुनाव है और जेड 2029 का लोकसभा चुनाव है. दो पायदान के बाद विपक्ष की एबीसीडी खत्म हो जाएगी क्योंकि एक्स के बाद वाई और जेड आने में समय नहीं लगेगा. बीजेपी विधायक ने सपा नेता के द्वारा दिए गए राणा सांगा के बयान और विपक्ष को घेरते हुए कहा कि ये लोग वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को बहला फुसलाकर अपनी ओर करना चाहते हैं. ओबीसी वोट को खींचना चाहते हैं. इनका असरोकार जमीनी समस्याओं से नहीं है. ये काम नहीं करना चाहते हैं फिर चाहे सपा हो या कांग्रेस पार्टी दोनों ही सिक्के के दो पहलू हैं. विपक्ष की जुबान पर सिर्फ आक्रांताओं का ही नाम रहता है. विपक्ष हमेशा कहता था कि जो जीता वो सिकंदर लेकिन कभी इन्होंने उन लोगों का नाम नहीं लिया जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया है.
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