अपने बुरे दौर में भी यहां मजबूत है बसपा, मायावती के साथ चट्टान की तरह खड़े जाटव मतदाता
Lok Sabha Elections 2024 Phase 6: बसपा अपने बुरे दौर से गुजर रही है. बहुत कम ही सीटों पर लड़ाई में दिख रही है. लेकिन, मायावती ने जाटव समुदाय के बीच पकड़ नहीं खोई है.
![अपने बुरे दौर में भी यहां मजबूत है बसपा, मायावती के साथ चट्टान की तरह खड़े जाटव मतदाता Lok sabha elections 2024 phase 6 jatav voters are still with bsp chief mayawati अपने बुरे दौर में भी यहां मजबूत है बसपा, मायावती के साथ चट्टान की तरह खड़े जाटव मतदाता](https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2024/05/11/f3c550c85fe1553648ff3ec23cc3089d1715440489392487_original.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=1200&height=675)
Lok Sabha Elections 2024: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के पांच चरणों की वोटिंग हो चुकी हैं. 25 मई को छठवें चरण में 14 सीटों पर वोटिंग होनी है. इनमें से ज्यादातर वो सीटें हैं जो पूर्वांचल में आती है. इस बार चुनाव में खास बात ये देखी जा रही है लड़ाई दो तरफा हैं ज्यादातर सीटों पर एनडीए और इंडिया के बीच टक्कर है. बसपा यहां बेहद कमजोर दिख रही हैं. बावजूद इसके मायावती की अपने वोटर्स पर पकड़ बरकरार है.
बहुजन समाज पार्टी इन दिनों अपने बुरे दौर से गुजर रही हैं. बसपा पर बीजेपी की बी टीम होने की आरोप लगता है. वहीं कांग्रेस-सपा गठबंधन मज़बूती के साथ दलितों-पिछड़ों के हक की बात उठाता दिख रहा है और बीजेपी पर संविधान बदलकर आरक्षण खत्म कर देने का आरोप लगा रहा है. मायावती इस चुनाव में अकेले ही मैदान में हैं. बसपा बहुत कम ही सीटों पर लड़ाई में दिख रही है. लेकिन, फिर भी मायावती ने इस हिस्से में अपने जाटव समुदाय के बीच पकड़ नहीं खोई है.
मायावती के साथ खड़े हैं जाटव
कई क्षेत्रों में दलित खासतौर से जाटव समाज के लोग आज भी मायावती के साथ खड़े हैं. उनका मानना है कि भले ही हाथी लड़ाई में हो या नहीं लेकिन, वो मायावती के साथ हैं. उनका वोट बसपा को ही जाएगा. चाहें उनका उम्मीदवार जीते या हारे. जनसत्ता अखबार में छपी खबर के मुताबिक दलित मानते हैं कि वो सालों से बसपा को वोट देते आ रहे हैं और उसे ही वोट देंगे. चाहे उनका उम्मीदवार हार जाए.
यूपी के प्राइवेट प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले राम रतन जाटव समाज से ही है उन्हें भी डर है कि बीजेपी आरक्षण ख़त्म कर सकती है. वो कहते हैं कि सरकार हमें पांच किलो राशन दे रही है लेकिन हमें नौकरियों की चिंता है. हम ग़रीबी के चक्र से निकलना चाहते हैं. बच्चों के लिए नौकरी चाहते हैं.
पिछले कुछ सालों में बीजेपी दलितों में जबरदस्त सेंध लगाई है. शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और मुफ्त राशन के बाद बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग बीजेपी के साथ जुड़े हैं. इनमें धोबी, सटीक, सोनकर समेत कई जातियां शामिल हैं लेकिन बसपा का जाटव वोट अब भी मायावती के साथ है. उनका मानना है कि भले ही मायावती के शासन में उन्हें फायदा हुआ लेकिन, आज वो कमजोर हैं तो वो उनका साथ नहीं छोड़ेंगे.
आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले कुछ सालों में भले ही बसपा की सीटों में कमी आई लेकिन उसका वोट शेयर बना रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा को सिर्फ एक सीट मिली लेकिन पार्टी की वोट शेयर 12.9 फीसद था. यूपी में अकेले जाटव समाज की आबादी है 13 फीसद है. इसी तरह साल 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा को 19.77% वोट शेयर रहा था भले ही बसपा को एक भी सीट नहीं मिली. साल 2019 में बसपा को दस सीटें मिली और वोट शेयर 22.23 रहा.
मेनका गांधी की सीट फंस गई है? अब इस नेता पर सबकी निगाह, पलट सकते हैं बाजी
![IOI](https://cdn.abplive.com/images/IOA-countdown.png)
ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस
![ABP Premium](https://cdn.abplive.com/imagebank/metaverse-mid.png)
![शिवाजी सरकार](https://feeds.abplive.com/onecms/images/author/5635d32963c9cc7c53a3f715fa284487.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=70)