महागुन बिल्डर के कार्यालय में हुई डकैती का पर्दाफाश, सुपरवाइजर ही निकला मास्टरमाइंड
एडीजी ने बताया कि सुपरवाइजर ललित को कार्यालय में होने वाली सभी गतिविधियों की जानकारी थी। उसने अपने साथी उदय को बताया कि बिल्डर ने 10 अप्रैल को मोटी रकम कार्यालय की तिजोरी में रखी हुई है।
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नोएडा, एबीपी गंगा। सेक्टर-63 स्थित महागुन बिल्डर के कॉरपोरेट कार्यालय में हुई डकैती का पुलिस ने शनिवार को पर्दाफाश किया। बिल्डर के कार्यालय में कार्यरत सुपरवाइजर ललित की रेकी पर 11 बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था, जबकि एक महिला समेत तीन लोग वारदात की योजना बनाने में शामिल थे। पुलिस ने महिला समेत सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से लूटे गए 35 लाख रुपये में 8 लाख 5 हजार नकद बरामद किया गया है। इसके अलावा कंपनी से लूटी गई सेंट्रो कार, दो डीवीआर, कटी हुई तिजोरी, गैस कटर बरामद किया गया है।
पूरी थी जानकारी
सेक्टर-14ए स्थित एसएसपी कार्यालय में डकैती का पर्दाफाश करने को लेकर शनिवार को एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि पुलिस ने उदय प्रताप सिंह, गजराज जाटव, ललित कुमार उर्फ भूरा, ओमप्रकाश व सीमा निवासी विजय नगर, गाजियाबाद और सचिन निवासी बुलंदशहर व विवेक पाल निवासी मैनपुरी को गिरफ्तार किया है। अभी सचिन ठाकुर व दीपक कुमार निवासी सिकंदराबाद, जिला बुलंदशहर, आसिफ, नव रतन उर्फ मामा, डॉ. राम प्रकाश सारस्वत व दो अज्ञात आरोपी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सीमा डकैती की योजना बनाने में शामिल रही है, जबकि सुपरवाइजर ललित ने महागुन कार्यालय में नकदी रखे होने की जानकारी दी थी।
पहली बार में नहीं हुए सफल
एडीजी ने बताया कि सुपरवाइजर ललित को कार्यालय में होने वाली सभी गतिविधियों की जानकारी थी। उसने अपने साथी उदय को बताया कि बिल्डर ने 10 अप्रैल को मोटी रकम कार्यालय की तिजोरी में रखी हुई है। चुनाव आचार संहिता के चलते पकड़े जाने की डर से पैसे को घर नहीं लेकर जाया जा रहा है। लूट करने पर मोटी रकम बरामद हो सकती है। इसके बाद उन्होंने मुख्य आरोपी गजराज को नकदी की जानकारी दी। गजराज ने अपने पड़ोस में रहने वाले विवेक को रेकी करने के लिए कहा। विवेक सेक्टर-63 में ही ए-43 में नौकरी करता है। उसने रेकी कर बताया कि कार्यालय के पीछे एक कंपनी बंद है, जहां से महागुन के अंदर आसानी से आ सकते हैं और गार्डों को पता नहीं चलेगा। योजना के तहत बदमाशों ने 13 अप्रैल को डकैती का प्रयास किया था, लेकिन गार्डों की सतर्कता से सफल नहीं हो पाए।
नक्शा बनाकर कंपनी में डकैती डाली
पहली बार असफल होने के बाद बदमाशों ने 22 अप्रैल की रात डॉ. राम प्रकाश सारस्वत के घर पर बैठक कर योजना बनाई। इस दौरान ललित ने कार्यालय का नक्शा बनाकर दिया और शनिवार की रात (27 अप्रैल) घटना को अंजाम देने का फैसला लिया गया। अवकाश होने के कारण शनिवार व रविवार का दिन चुना गया था। वारदात की रात सभी तिगरी गोल चक्कर पर मिले और ट्रक में सवार होकर रात 11 बजे महागुन के पीछे बंद कंपनी के सामने पहुंचे। ललित व चालक ट्रक में बैठे रहे, जबकि अन्य बदमाश कंपनी में घुस गए। गार्डों को काबू में कर रायफल छीन ली और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद तिजोरी को कंपनी की सेंट्रों कार की डिग्गी में डाल कर सभी फरार हो गए।
बनाया था पुख्ता प्लान
तिजोरी को गैस कटर से काटकर रुपये निकालने के बाद बदमाशों ने महागुन की लूटी गई कार 130 मीटर सड़क पर लावारिस छोड़ दी। बदमाशों ने उसी रात पैसे का बंटवारा कर लिया। सचित ठाकुर ने चार लाख रुपये भंडारे के लिए अलग कर दिया और दो लाख रुपये जेल में बंद साथी बदमाशों की जमानत के लिए ले लिया। इसके बाद गजराज व उदय 3-3 लाख, सचिन विवेक 2-2 लाख व ललित एक लाख रुपये लेकर फरार हो गए।
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