नई दिल्ली, एबीपी गंगा। आम जनता का आम बजट संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को पेश किया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में जहां एक तरफ उच्च आय वर्ग पर टैक्स टैक्स दरें बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है, वहीं प्रत्यक्ष कर के स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। मिडिल क्लास को इस बजट में राहत दी गई है। पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाया है। आम बजट में इन तमाम प्रस्तावों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्ष का कहना है कि इस बजट में सरकार की तरफ से कुछ भी नया नहीं है।


प्रधानमंत्री ने की बजट की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारीफ करते हुए कहा कि ये एक ग्रीन बजट है, जिसमें पर्यावरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सोलर सेक्टर पर विशेष बल दिया गया है। पिछले 5 साल में देश निराशा के माहौल को पीछे छोड़ चुका है। आज देश उम्मीदों और आत्मविश्वास से भरा हुआ है।


लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बजट की आलोचना करते हुये कहा कि पुराने वादों को ही दोहराया गया है। वे नए भारत के बारे में बात कर रहे हैं लेकिन यह बजट सिर्फ एक नई बोतल में पुरानी शराब है। नया कुछ भी नहीं है, रोजगार पैदा करने की कोई योजना नहीं है, कोई नई पहल नहीं है।


वहीं कांग्रेस ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुये लिखा कि 'अब जब अंततः सरकार ने 45 साल की उच्चतम बेरोजगारी की हकीकत को स्वीकार कर लिया है, तो बजट 2019 के जरिए देश में रोजगार सृजन के लिए एक विस्तृत योजना की जरूरत है। इससे जीएसटी और नोटबंदी के विपरीत प्रभावों से निपटने में मदद मिलेगी।'


पूंजीपतियों की मदद करनेवाला बजट: मायावती


बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कहा, 'यह बजट प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देकर कुछ बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों की ही हर प्रकार से मदद करने वाला है, जिससे दलितों व पिछड़ों के आरक्षण की ही नहीं बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, किसान व ग्रामीण समस्या और भी जटिल होगी। देश में पूंजी का विकास भी इससे संभव नहीं है।'