Lockdown in India 3 मई तक बढ़ाया गया लॉक डाउन....20 अप्रैल तक राज्यों में होगा स्थिती का मूल्यांकन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करते हुये मंगलवार को बड़ा एलान किया। कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है।
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नई दिल्ली, एबीपी गंगा। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बड़ा एलान करते हुये देश में लॉक डाउन 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपील की है कि जनता इसका ठीक उसी तरह पालन करेगी जैसा वो करती आ रही है। यही नहीं पीएम ने जानकारी देते हुये कहा कि 30 अप्रैल तक राज्य स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद कुछ शर्तों के साथ जरूरी सेवाओं को शुरू करने की इजाजत दी जाएगी। अपने 24 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण रोकने में अन्य देशों के तुलना में भारत ने समय रहते असरदार तरीके से कदम उठाये। संविधान निर्माता बाबा साहब भीम राव अंबेडकर को याद करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सामूहिक प्रदर्शन की शक्ति ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रधानमंत्री के संबोधन की खास बातें इस तरह हैं....
सामूहिक शक्ति का ये प्रदर्शन बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि है लेकिन आप देश की खातिर, एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं। हमारे संविधान में जिस वी द पीपुल ऑफ इंडिया की शक्ति की बात कही गई है, वो यही तो है। बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की जन्म जयंती पर, हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का ये प्रदर्शन, ये संकल्प, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
भारत ने उठाये जरूरी कदम लॉकडाउन के इस समय में देश के लोग जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, जितने संयम से अपने घरों में रहकर त्योहार मना रहे हैं, वो बहुत प्रशंसनीय है। आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, आप उसे भली-भांति जानते हैं। अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी।
जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने, समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी, उसे, तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया। भारत ने होलिस्टिक अप्रोच न अपनाई होती, इंटिग्रेडिड अप्रोच न अपनाई होती, तेज फैसले न लिए होते तो आज भारत की स्थिति कुछ और होती। लेकिन बीते दिनों के अनुभवों से ये साफ है कि हमने जो रास्ता चुना है, वो सही है।
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