Prayagraj: पुलिस कमिश्नर की कोर्ट का अनूठा रिकॉर्ड, 15 घंटे तक लगातार सुनवाई की, 712 केस के सभी आरोपी बरी
प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर की कोर्ट ने अनूठा रिकार्ड बनाया है. एक दिन में 712 मुकदमों का निस्तारण किया गया. अदालत की कार्रवाई के दौरान पुलिस कमिश्नर को 3000 से ज्यादा फाइलों पर दस्तखत भी करने पड़े.

Prayagraj News: संगम नगरी प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर की कोर्ट ने अनूठा रिकॉर्ड कायम किया है. अदालत ने पंद्रह घंटे तक लगातार सुनवाई करते हुए एक ही दिन में सात सौ से ज्यादा मुकदमों का निस्तारण किया है. यह सभी मामले गुंडा एक्ट से जुड़े हुए थे. सभी आरोपी गुंडा एक्ट के आरोपों से बरी कर दिए गए हैं. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों ने आरोपियों की तरफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की. अदालत की कार्रवाई के दौरान पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा को साढ़े तीन हजार से ज्यादा फाइलों पर दस्तखत भी करने पड़े.
दरअसल, प्रयागराज में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की शुरुआत होने के बाद डीएम ऑफिस से गुंडा एक्ट की 3853 फाइलें पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के यहां ट्रांसफर हुई थी. यह सभी मामले साल 2008 से 2022 के बीच के थे. बड़ी संख्या में मामलों के पेंडिंग होने की वजह से पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा हफ्ते में तीन दिन कोर्ट में सुनवाई कर फाइलों का निपटारा कर रहे थे. मुकदमों का बोझ कम करने के लिए हर दिन तकरीबन सौ मामलों में सुनवाई की जाती थी.
712 मामलों की हुई सुनवाई
शनिवार को देर रात तक जिन 712 मामलों की सुनवाई की गई. वह सभी गुंडा एक्ट से जुड़े हुए थे. पुलिस कमिश्नर की कोर्ट ने सभी 712 मामलों को निस्तारित करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया है. इन सभी के खिलाफ सिर्फ एक ही मुकदमे के आधार पर गुंडा एक्ट की नोटिस जारी की गई थी. आरोपों से बरी होने की वजह से यह सभी आरोपी अब जिला बदर की कार्रवाई से भी बच जाएंगे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अपने एक फैसले में सिर्फ एक ही मुकदमे में आरोपी होने पर जिला बदर की कार्रवाई किए जाने पर नाराजगी जताई थी. हाईकोर्ट के इसी फैसले के आधार पर सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मिता दीक्षित और करन मल्होत्रा ने भी ऑनलाइन तरीके से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर आरोपियों की तरफ से पैरवी की थी. सुप्रीम कोर्ट के इन वकीलों ने आरोपियों से कोई फीस भी नहीं ली और नि: शुल्क पैरवी की. मामलों की सुनवाई पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा की कोर्ट में शनिवार सुबह करीब आठ बजे शुरू हुई थी. अदालत ने रात करीब ग्यारह बजे तक लगातार सुनवाई की.
ये भी पढ़ें: आकाश आनंद पर एक्शन के बाद BSP में भूचाल, नेताओं ने लगाई इस्तीफे की झड़ी
ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस
