Taj Mahal Controversy: ताजमहल के कमरे खोलने की याचिका खारिज होने के बाद बोले वकील- हम हिस्ट्री एकेडमी और ASI को लिखेंगे चिट्ठी
Taj Mahal controversy: इलाहाबाद की लखनऊ पीठ ने आज उस याचिका को खारिज कर दिया है. जिसमें ताजमहल के बंद दरवाजों को खोलने की गुजारिश की गई थी.
Taj Mahal Latest News: इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ (Lucknow Bench) में गुरुवार को ताजमहल के बंद 22 दरवाजों को खोलने की गुजारिश वाली याचिका पर सुनवाई की गई. जिसमें कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने कहा कि, हमें चौथी बेसमेंट में बने वॉल जो बंद हैं उनकी स्टडी करने की इजाज़त दी जाए. कोर्ट ने हमारी अपील को ख़ारिज किया है और हमें इसपर रिसर्च करने को कहा है. ऐसे में हमारा अगला क़दम होगा कि हम हिस्ट्री अकादमी को अपरोच करें. वकील ने कहा कि हम कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए अगले कुछ दिनों में हिस्ट्री एकेडमी और एएसआई को पत्र लिखेंगे
मामला न्यायिक नहीं बल्कि विवादास्पद है - कोर्ट
सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने बताया कि, कोर्ट का मानना है कि ये मामला न्यायिक नहीं बल्कि विवादास्पद है, आप इसपर डिबेट कर सकते हैं. हमारी 4 अपील थी, पहली फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई जाए, दूसरी बंद कमरों को खोला जाए, तीसरी इससे जुड़े एक्ट का पुनर्लेखन. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिका समुचित और न्यायिक मुद्दों पर आधारित नहीं है. इसलिए ही जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया.
जानिए क्यों दर्ज हुई याचिका
आपको बता दें कि तामहल के बंद कमरों को खोलने वाली याचिका अयोध्या के रहने वाले बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने दायर की थी. जिसमें उन्होंने इतिहासकार पीएन ओक की किताब ताजमहल का हवाला देते हुए ये दावा किया गया कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है और इसका निर्माण 1212 में राजा परमार्दी देव ने करवाया था.
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