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यूपी में ऑक्सीजन संकट दूर करने के लिए योगी सरकार ने उठाए ये कदम, बदल चुके हैं हालात 

कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी और एक साथ इतने मरीज सामने आ गए कि ऑक्सीजन की पूरे प्रदेश में किल्लत हो गई. यूपी में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति करने के लिए कमेटी बनाई गई, जिसकी वजह से अब हालात बदल चुके हैं.

लखनऊ: कोरोना की दूसरी लहर में हर दिन मरीजों की संख्या लाखों में आने लगी तो उत्तर प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 38 हजार तक सामने आने लगे. ऐसे में अस्पतालों में बेड, रेमेडिसिवर इंजेक्शन ऑक्सीजन की कमी हो गई. ऑक्सीजन की कमी के चलते हर तरफ हाहाकार सा मच गया. लेकिन, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में जब ये दिक्कतें बढ़ने लगीं तो उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग कमेटियां बनाईं और इन्हीं में से एक कमेटी यूपी में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति करने के लिए बनाई गई. इसकी कमान सौंपी गई यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी को. जिन्होंने दिन-रात लगातार मेहनत करके उत्तर प्रदेश में जो ऑक्सीजन की कमी थी उसे दूर करने के तमाम जतन किए. इसका असर ये हुआ कि अब यूपी में एक हजार मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन की उपलब्धता है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. नीति आयोग ने भी यूपी के ऑक्सीजन आपूर्ति मॉडल को काफी सराहा है जिसने पूरे प्रदेश में बेहतर प्रबंधन के लिए देश में एक मिसाल कायम की है.  

ऑक्सीजन की किल्लत हो गई
कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी और एक साथ इतने मरीज सामने आ गए कि ऑक्सीजन की पूरे प्रदेश में किल्लत हो गई. अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं, ऑक्सीजन प्लांट पर ऑक्सीजन नहीं हर जगह लंबी-लंबी कतार ही नजर आने लगी. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऑक्सीजन की कमी को दूर करने का बीड़ा उठाया और यूपी में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के निर्देश अधिकारियों को दिए. मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी को. अवनीश अवस्थी लगातार इस काम में जुट गए कि यूपी में ऑक्सीजन की कमी ना रहने पाए. 

अप्रैल के दूसरे हफ्ते के बाद आई तेजी 
ऑक्सीजन व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रदेश में अप्रैल के दूसरे हफ्ते के बाद जो तेजी आई तो उसका असर ये हुआ कि 13 मई को यूपी में एक दिन में 24 घंटों में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों, निजी अस्पतालों और रिफिलर्स को रिकॉर्ड 1031.43 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है. इसमे से 623.11 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति रिफिलर्स को, 313.02 मीट्रिक टन प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानो को तथा 95.29 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति ऑक्सीजन सप्लायर्स द्वारा सीधे निजी चिकित्सालयों को की गई है. 

अब मांग से ज्यादा आपूर्ति हो रही है
इतना ही नहीं सेल्फ प्रोडक्शन के तहत एयर सेपरेटर्स यूनिट्स के माध्यम से भी 81.87 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आपूर्ति की गई है. होम आईसोलेशन के 3471 मरीजों को भी कुल 26.44 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति सिलेंडरों के माध्यम से बीते 24 घंटों में की गई है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है और साथ ही ये भी दिखलाता है कि कैसे जिस यूपी में 25 दिन पहले ऑक्सीजन को लेकर हर तरफ हाहाकार मचा हुआ था वहां अब मांग से ज्यादा आपूर्ति हो रही है. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ये संभव कैसे हुआ.  

उठाए गए प्रभावी कदम 

प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में कोविड-19 के वर्तमान संकट काल में उत्पन्न हुई ऑक्सीजन की समस्या से निपटने के लिए ‘ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम फॉर यूपी’ नाम का डिजीटल प्लेटफार्म तैयार किया गया. जिसका उद्घाटन 23 अप्रैल 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. ये व्यवस्था शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना. 

उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा शुरू की गई इस पारदर्शी व्यवस्था की देश भर में सराहना हुई है. कई राज्यों ने प्रदेश सरकार की इस नई व्यवस्था के संबंध में गहरी रुचि भी दिखाई है. 

प्रदेश के गृह विभाग में अलग से एक ‘‘विशेष नियंत्रण कक्ष’’ बनाकर ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति के संबंध में लगातार निगरानी रखी जा रही है.  

यूपी और अन्य संसाधन वाले राज्यों जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाने वाले ट्रकों को रोकने के लिए टीमों को सक्रिय किया गया. एक एप्लिकेशन को तैयार किया जो स्मार्टफोन पर डाउनलोड किया गया था जिसे फील्ड में चल रहे ट्रकों में से प्रत्येक में रखा गया था, ताकि उनके चल रहे मार्ग में कठिनाई ना हो. 

रेलवे मार्ग से ऑक्सीजन लाने वाला भी यूपी पहला राज्य है. उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड में स्थित ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन प्रदेश में लाए जाने की व्यवस्था की गई है, जिसकी पूरी ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जा रही है.

ऑक्सीजन की उपलब्धता में लगने वाले समय को और कम किए जाने हेतु खाली टैंकर को हवाई जहाज से रिफिलिंग स्टेशन तक पहुंचाए जाने तथा वहां से सड़क मार्ग के जरिए यूपी में ऑक्सीजन लाने की व्यवस्था की गई. यूपी की सीमा से अन्य राज्यों के द्वारा होकर आने वाले टैंकर को ग्रीन कॉरीडोर बनाकर उन्हे निर्धारित स्थान तक शीघ्र पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है.  

ऑक्सीजन के सही उपयोग हेतु ऑक्सीजन ऑडिट की व्यवस्था की गई है ताकि उसकी बचत कर उसका सदुपयोग किया जा सके. इसके लिए आईआईटी कानपुर द्वारा सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है. इस कार्य में आईआईएम लखनऊ, आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू वाराणसी, एकेटीयू लखनऊ, एमएमटीयू गोरखपुर, एचबीटीयू कानपुर, एनएनआईटी प्रयागराज और एसजीपीजीआई का सहयोग लिया गया है. 

वर्तमान में, राज्य में ऑक्सीजन की आपूर्ति की स्थिति की बारीकी से निगरानी के लिए एक जिलावार दैनिक ऑक्सीजन आपूर्ति रिपोर्ट संकलित की जा रही है. भारत सरकार द्वारा 894 मीट्रिक टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (lmo) का आवंटन उत्तर प्रदेश के लिए किया गया है. ये उल्लिखित करना है कि पहली अप्रैल 2021 तक दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता थी.

कोविड के सक्रिय मामलों में वृद्धि को देखते हुए, राज्य ने एलएमओ की मांग में वृद्धि की आशंका को देखते हुए भारत सरकार से 1500 मीट्रिक टन की मांग की गई. राज्य में विद्यमान ऑक्सीजन उत्पादन (पीएसए) संयंत्र 25 की संख्या में हैं. इसके अलावा भारत सरकार ने 14 संस्थानों के लिए 14 पीएसए संयंत्रों को मंजूरी दे दी है. उपरोक्त में से 5 संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और शेष 9 कार्यान्वयन के अधीन हैं. राज्य सरकार ने 22 पीएसए संयंत्रों के लिए खरीद आदेश जारी किए हैं. 

भारत सरकार की तरफ से किए गए एलएमओ के आवंटन झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे दूर के राज्यों में स्थित थे. आज की तारीख में ऑक्सीजन टैंकरों को ले जाने के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों का उपयोग लखनऊ/बरेली से बोकारो, दुर्गापुर से वाराणसी/कानपुर, जमशेदपुर से लखनऊ, दिल्ली से जामनगर के मार्गों पर किया गया है.  

यूपी में 5 प्रमुख हब की पहचान की गई जिनमें मोदीनगर, आगरा, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी शामिल हैं. बरेली और गोरखपुर, द्वितीयक हब के रूप में पूरी आपूर्ति के अनुकूलन के लिए सम्पूर्ण सप्लाई चेन के रूप में कार्य करते हैं. इन हब ने अपने आसपास के क्षेत्रों को अधिकतम 10 घंटे की चक्रीय समय सीमा के भीतर, यानी इन हब के भीतर आने वाले सभी टैंकरों को इन क्षेत्रीय केंद्रों के भीतर भेजना और निर्धारित स्थानों पर ऑक्सीजन वितरित करके हवाई अड्डों पर 10 घंटे के भीतर पहुंचना होगा.

एक बार जब खाली टैंकर दो के बैच में वापस आ जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द भरे जाने के लिए भेजा जाता है और लोडिंग और होपिंग के लिए रेल यार्ड में डाल दिया जाता है. इसके बाद, ट्रेन को उसपर 4 टैंकरों की रेक के साथ भेज दिया जाता है. प्रत्येक ट्रेन समर्पित हब के लिए कम से कम 80 मीट्रिक टन वहन करती है. 

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप मात्र 3 दिनों के भीतर यूपी का पूरा राज्य संगठित तरीके से हर 24 घंटे में सभी प्रमुख स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को 800 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति करने में सक्षम था.  

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