महाकुंभ में भगदड़ पर भड़के विपक्षी सांसद, सपा से शिवसेना तक ने लगाए गंभीर आरोप, जानें- किसने क्या कहा?
मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज में हुई भगदड़ में प्रशासन के मुताबिक 30 लोगों की मौत हुई, लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन के यह आंकड़े भरोसे लायक नहीं है.
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Maha Kumbh Stampede: उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में मौनी अमावस्या के मौके पर हुई भगदड़ और उसमें हुई मौतों के मामले पर विपक्ष लगातार उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहा है. तमाम विपक्षी पार्टियां सरकार और प्रशासन के द्वारा दिए गए मौत के आंकड़े पर भी सवाल उठा रहे हैं. विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन ने मौत के जो आपने पेश किए हैं उन पर भरोसा करना मुश्किल है.
मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज में हुई भगदड़ में प्रशासन के मुताबिक 30 लोगों की मौत हुई, लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन के यह आंकड़े भरोसे लायक नहीं है. क्योंकि जिस तरह की तस्वीर और जानकारी सामने आई है वह यह बता रही है कि प्रशासन के द्वारा दिए गए इन आंकड़ों से वह सच्चाई सामने नहीं आ रही जो असल में घटना के दौरान घटी है.
क्या बोले सपा चीफ?
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन के द्वारा प्रयागराज कुंभ में भगदड़ के दौरान हुई मौतों का जो आंकड़ा पेश किया है वह विश्वास करने योग्य नहीं है, सरकार को सच बताना चाहिए.
वहीं राजद सांसद मनोज झा ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि कुंभ से जिस तरह की जानकारी और तस्वीरें सामने आई है वह बता रही है की घटना कितनी बड़ी थी, लेकिन सरकार के द्वारा जो 30 मौतों का आंकड़ा पेश किया गया है वह सच की असली तस्वीर सामने नहीं रख रहा.
Shiv Sena UBT ने उठाए ये सवाल
शिवसेना उद्धव गुट के सांसद अनिल देसाई ने भी प्रयागराज की घटना पर सवाल उठाते हुए कहा की एक तरफ सरकार दावे कर रही थी कि करोड़ों लोगों के लिए इंतजाम किए गए हैं लेकिन इस घटना ने सरकार के दावों की कलई खोल दी. अनिल देसाई ने कहा की सरकार की तरफ से मौतों का जो आंकड़ा पेश किया गया है वह सही नहीं लग रहा. सरकार को इस पर सामने आकर सफाई देनी चाहिए.
उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने घटना के करीब 17 घंटे बाद सामने आकर घायलों और मृतकों के बारे में आधिकारिक जानकारी दे चुका है. प्रशासन के मुताबिक मौनी अमावस्या के दौरान हुई भगदड़ के दौरान 90 लोग घायल हुए थे जिसमें से 30 की मौत हो गई जबकि बाकी लोगों का इलाज चल रहा है. लेकिन विपक्ष लगातार घायलों और मृतकों की संख्या को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन के आंकड़ों पर अविश्वास जता रहा है.
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