Dehradun News: उत्तराखंड (Uttarakhand) में आम लोगों में जागरूकता न होने के चलते फाइनेंस कम्पनियों, चिटफंड के साथ ही किट्टी कमेटी के नाम पर आम जनता से करोड़ों का फ्रॉड करने वाले आरोपी आज भी बाहर घूम रहे हैं, जबकि इन आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे होना था. उत्तराखंड में दिव्यांश निधि लिमिटेड, दिव्यांश प्रोसेसर स्टोन एण्ड मैटल प्राइवेट लिमिटेड, दिव्यांश एडवाईजरी और दिव्यांश ग्रुप ऑफ कम्पनीज, कबीर म्यूच्यूअल बेनिफिट निधि लिमिटेड जनशक्ति मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी, जनहित निधि लिमिडेट, सर्वोत्तम एग्रो को-ऑपरेटिव सोसायटी, सहित करीब एक दर्जन कम्पनियां हैं और कई चिटफंड के साथ किट्टी कमेटी हैं, जिन्होंने आम जनता को लालच देकर करोड़ों की ठगी की है.


इन आरोपियों पर केवल फ्रॉड की धाराओं में ही मुकदमा दर्ज हुआ है, जिससे ये शातिर आरोपी आसानी से छूट जाते हैं. आसान धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के चलते ये फ्रॉड कोर्ट से बेल लेकर बाहर घूमते हैं, क्योंकि इन धाराओं में 7 साल से कम की सजा है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 7 साल से कम की सजा वाले अपराधियों को पुलिस जेल नहीं भेज सकती जबकि साल 2019 में केंद्र सरकार ने बड्स (Banning of Unregulated Deposit Scheme Act 2019) बनाया जा चुका है. जिसमें आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच के साथ ही 7 से 10 साल की सजा है और ये एक्ट फाइनेंस फ्रॉड करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए ही बनाया गया था.


पुलिस मुख्यालय से सख्ती बरतने के आदेश
बड़ी बात यह है कि इस एक्ट में आज तक एक भी मुकदमा प्रदेश में दर्ज नहीं हुआ जिस पर नाराजगी जताते हुए अब पुलिस मुख्यालय से सख्ती बरतने के आदेश जारी हुए हैं. प्रदेश में किसी भी फाइनेंस फ्रॉड पर सही से कार्रवाई न होने के चलते अब एडीजी एलओ वी मुरुगेशन ने सख्त निर्देश जारी किये हैं और 2019 के बाद सभी मामलों में बड्स एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किये हैं. उम्मीद जताई जा सकती है कि पुलिस की कार्रवाई सही ढंग से हुई तो फाइनेंस फ्रॉड पर लगाम लगेगी. साथ ही लोगों को भी ऐसे लालच में आने से पहले जागरूक होना होगा.


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