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उत्तरकाशी में लगातार आ रहे छोटे भूकंप, क्या बड़ा झटका संभव? जानें वैज्ञानिकों की राय

उत्तरकाशी में पिछले तीन महीनों से कोई जिला आपदा अधिकारी नहीं है. ऐसे संवेदनशील समय में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है. वैज्ञानिक ने सतर्क रहने को कहा.

Uttarakhand News: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पिछले 10-15 दिनों से लगातार छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है. हाल ही में एक अफवाह के कारण लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या उत्तरकाशी में कोई बड़ा भूकंप आने वाला है?

उत्तरकाशी में पिछले तीन महीनों से कोई जिला आपदा अधिकारी नहीं है. ऐसे संवेदनशील समय में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है. भूकंप से जुड़ी कोई ठोस जानकारी न होने की वजह से अफवाहें और भय फैल रहा है.

छोटे भूकंप आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होते हैं
इस भूकंपीय गतिविधि को समझने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार से बातचीत की गई. उन्होंने बताया कि पिछले 10 दिनों में उत्तरकाशी क्षेत्र में 8 से 12 भूकंप आए हैं, जिनमें सबसे अधिक तीव्रता 3.5 रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई.

डॉ. कुमार के अनुसार, इस तरह के छोटे भूकंप आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी झटके भटवाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न हुए हैं, जो उत्तरकाशी का हिस्सा है. उत्तरकाशी भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है क्योंकि यह हाई हिमालयन सिस्मिक जोन में आता है. उत्तराखंड का अधिकतर हिस्सा सिस्मिक जोन 4 और 5 में स्थित है, जो भूकंप के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं.

पिछले 10 वर्षों में 700 से अधिक छोटे भूकंप दर्ज
डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में 25 से अधिक सिस्मिक मीटर लगे हुए हैं, जो भूकंप की गतिविधियों की निगरानी करते हैं. हालांकि, विज्ञान अभी तक यह अनुमान नहीं लगा सकता कि कोई बड़ा भूकंप कब आएगा. हाल ही में तिब्बत में 7.1 रिक्टर स्केल का एक बड़ा भूकंप आया था. डॉ. नरेश कुमार के अनुसार, इस भूकंप ने आफ्टरशॉक्स के रूप में 300 से 400 छोटे झटकों को जन्म दिया था.

उत्तराखंड में भी पिछले 10 वर्षों में 700 से अधिक छोटे भूकंप दर्ज किए गए हैं. हालांकि, ये सभी कम तीव्रता के थे. लेकिन 2017 में रुद्रप्रयाग में 7.8 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था, जिससे क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था. उत्तरकाशी का बड़ा हिस्सा MCT (Main Central Thrust) के ऊपर स्थित है, जो प्लेटों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र होता है. इस क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल अधिक होने की वजह से भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं.

लोगों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के अर्थ साइंसेज विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के लगातार टकराव के कारण उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में भूकंप आते रहते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में उत्तरकाशी में कोई विनाशकारी भूकंप नहीं आया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य में कोई बड़ा भूकंप नहीं आएगा.

वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार छोटे भूकंप आना कई बार बड़े भूकंप से पहले की चेतावनी भी हो सकती है, लेकिन यह भी संभव है कि ये छोटे झटके प्लेटों में जमा ऊर्जा को धीरे-धीरे रिलीज कर रहे हों, जिससे बड़े भूकंप की संभावना कम हो जाए. हालांकि, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उत्तरकाशी में बड़ा भूकंप आएगा या नहीं. लेकिन चूंकि यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है, इसलिए लोगों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है.

भूकंप से बचाव के उपाय

  • आपातकालीन किट तैयार रखें: इसमें पानी, खाना, दवाइयां, टॉर्च, बैटरी आदि होनी चाहिए.
  • जबूत स्थान पर शरण लें: भूकंप के समय किसी मजबूत टेबल या दीवार के पास बैठें.
  • खुले स्थान पर जाएं: अगर संभव हो, तो तुरंत खुले स्थान की ओर बढ़ें, जहां कोई इमारत या पेड़ गिरने का खतरा न हो.
  • बिजली और गैस कनेक्शन बंद करें: भूकंप के दौरान आग लगने का खतरा रहता है, इसलिए बिजली और गैस को तुरंत बंद कर दें.
  • घबराएं नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दें.

उत्तरकाशी में लगातार छोटे भूकंप आने से लोग डरे हुए हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी घबराने की जरूरत नहीं है. उत्तरकाशी एक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र है, जहां हलचल बनी रहती है. प्रशासन की चुप्पी और आपदा प्रबंधन की कमी से लोगों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, कोई भी यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि बड़ा भूकंप कब आएगा, इसलिए हमें सतर्क रहने और भूकंप से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है.

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